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Friday, August 19th, 2022
धोखा’-‘जो खंजर पीठ से मैंने निकाला, उस पर उंगलियों के निशान तेरे थे…

धोखा’-‘जो खंजर पीठ से मैंने निकाला, उस पर उंगलियों के निशान तेरे थे…

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बोकारो। राष्ट्रीय कवि संगम, बोकारो महानगर इकाई द्वारा सोमवार की देर शाम आॅनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय कवि संगम, बोकारो महानगर इकाई के अध्यक्ष अरुण पाठक की अध्यक्षता तथा महासचिव ब्रजेश ब्रजवासी के संचालन में गूगल मीट पर आयोजित इस आॅनलाइन कवि सम्मेलन में उषा झा, कस्तूरी सिन्हा, कल्पना झा, अभिनव शंकर, गीता कुमारी, डाॅ निरुपमा कुमारी, अनिल कुमार श्रीवास्तव, क्रांति श्रीवास्तव, विशाल पंडित, शीला तिवारी व आकर्षिका अक्स ने विभिन्न रस की रचनाएं सुनाईं।
काव्यपाठ की शुरुआत कवयित्री उषा झा ने ‘हिंदी भाषा देश की, जिसकी नहीं मिशाल/समय समय पर विश्व में जिसने किया कमाल’ व गज़ल ‘उल्फतें तेरे लिए है, बंदगी तेरे लिए…’ सुनाकर की। गीता कुमारी ने गुरुवंदना-‘तूने मार्ग दिखाया’ व हिन्दी की महत्ता दर्शाती कविता-‘हिंदी है भारत का अभिमान, आओ मिलकर करें हिंदी का सम्मान..’, अभिनव शंकर ‘अनिकुल’ ने ‘कत्ल करने से पहले सलाम करते हैं, लोग कितनी खूबसूरती से अपना काम करते हैं..’, अनिल कंुमार श्रीवास्तव ने ‘दूर कहीं जब सारे होंगे, उतर सलोने चांद के मानिंद आंगन में, मैं फिर आऊंगा’, क्रांति श्रीवास्तव ने ‘धोखा’-‘जो खंजर पीठ से मैंने निकाला, उस पर उंगलियों के निशान तेरे थे’, कल्पना झा ने ‘पुरुष’-‘एक जैसा सख्त जो पिता और भाई में समाया था वो कोई और नहीं पुरुष कहलाया था..’ व ‘वृद्ध और पेड़’, शीला तिवारी ने ‘मैं राजनीति हूं’, विशाल पंडित ने ‘दिल में हिन्दुस्तान जिंदाबाद लिखना है, पटेल व सुभाष का संवाद लिखना है…’, आकर्षिका अक्स ने गुरु-शिष्य रिश्ते पर एक रचना के बाद ‘खामोशी’ शीर्षक कविता, ब्रजेश ब्रजवासी ने ‘क्रांतिकारियों की वीरता के प्रतिमान छोड़ प्रेमिका के रूप रंग यौवन को गायें क्या ?’, कस्तूरी सिन्हा ने ‘मेरी नज़रों में’ व अरुण पाठक ने हिंदी की सर्वस्वीकार्यता व महत्त्व को दर्शाती अपनी रचना ‘हिंदी है हम सबकी भाषा हिंदी है जन-जन की भाषा…’ सुनाकर सबकी दाद पाई। पठित रचनाओं पर समीक्षा टिप्पणी कवयित्री कस्तूरी सिन्हा ने दी।
प्रारंभ में इस वर्ष शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाज़ी गयीं राष्ट्रीय कवि संगम, बोकारो महानगर इकाई से जुड़ीं कवयित्री डाॅ निरुपमा कुमारी को सभी ने बधाई दी। साथ ही हाल ही में वल्र्ड ह्यूमन राइट्स फेडरेशन इंडिया के मानद निदेशक नियुक्त हुए कवि अभिनव शंकर को भी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी गयी। अंत में पिछले दिनों दिवंगत हुए वरिष्ठ साहित्यकार राम नारायण उपाध्याय को श्रद्धांजलि दी गयी।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में अरुण पाठक ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना संकट के इस दौर में राष्ट्रीय कवि संगम, बोकारो महानगर इकाई द्वारा आयोजित आॅनलाइन कवि सम्मेलन में जिस तरह से कवि-कवयित्रियों ने उत्साहपूर्वक अपनी भागेदारी निभाई वह काबिलेतारीफ है। आगे भी इस तरह के आयोजन आयोजित होगें। उन्होंने इस आयोजन में शामिल सभी रचनाकारों को धन्यवाद दिया।

 

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