नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सरला बिरला विश्वविद्यालय में विचार मंथन

रांची:सरला बिरला विश्वविद्यालय में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों, आवश्यक व वांछित बदलाव सहित इसके क्रियान्वयन पर सविस्तार विचार मंथन किया गया । राष्ट्रीय वेबीनार के तहत इस विचार मंथन में बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव श्री अतुल भाई कोठारी, मुख्य अतिथि झारखंड टेक्निकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ गोपाल पाठक, विशिष्ट अतिथि बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो डॉ इंद्रानिल मन्ना, विशिष्ट अतिथि आईआईएम रांची के निदेशक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार सिंह एवं कुलसचिव प्रो डॉ विजय कुमार सिंह आदि के द्वारा विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी सह प्रभारी कुलपति डॉ प्रदीप कुमार वर्मा के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों, उद्देश्य एवं क्रियान्वयन पर गहन विचार विमर्श किया गया।
बतौर मुख्य वक्ता श्री अतुल भाई कोठारी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत व हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय के इंतजार के बाद आम से लेकर आवाम के विचारों को लेकर नई शिक्षा नीति भारतीयता के अनुरूप बनाई गई है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य निर्माण एवं चरित्र निर्माण को इस नई शिक्षा नीति में स्थान दिया गया है। यह नीति समग्र, सर्वांगीण एवं एकाग्र है जिसमें स्थानीयता को विशेष महत्व दिया गया है। इस नीति में प्राचीनता एवं आधुनिकता दोनों का समावेश किया गया है। इस नीति में चरित्र निर्माण के साथ-साथ व्यक्तित्व के समग्र विकास एवं मूल्यपरक शिक्षा को समाहित किया गया है जिसके द्वारा व्यावहारिकता को महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा।
मुख्य अतिथि प्रो डॉ. गोपाल पाठक ने इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति को व्यापक, सारगर्भित, भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक नया मिसाल, नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षण व्यवस्था में काफी कुछ वंचित परिवर्तन किए गए हैं उच्च शिक्षा को एक अंब्रेला के अंतर्गत निहित की गई है।पंडित मदन मोहन मालवीय एवं स्वामी विवेकानंद जी के सपनों के भारत के निर्माण की दिशा में यह नई शिक्षा पद्धति अवश्य ही कारगर साबित होगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नए जेनरेशन की तैयारी की पूरी जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है, अब शिक्षकों को अपने गुरुत्व को साकार करने का वांछित अवसर प्रदान कराया जा सकेगा। नई शिक्षा नीति उद्यमिता विकास की दिशा में एक नई इच्छाशक्ति व ज्ञान के साथ-साथ कौशल विकास को महत्व दे रही है जिससे आने वाले समय में प्रतिभा का अवश्य ही उचित सम्मान मिलेगा। इस शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा एवं रिसर्च के क्षेत्र में काफी सार्थक एवं उपयोगी विजन के साथ दिखाई पड़ रही है।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार सिंह कहा कि साहस, शील,स्नेह, मानवता का त्रास हरने वाला, ज्ञानवान बनाने की मार्ग प्रशस्त करने वाला यह शिक्षा नीति भारत को ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में विश्व का जग सिर मौर बनाने में कामयाब हो सकेगा। नई शिक्षा नीति में विभिन्न विषयगत बाध्यता को समाप्त कर शिक्षा को काफी उदार बनाया गया है। नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा फार्मूला मात्री भाषा एवं स्थानीय भाषाओं का सम्मान बढ़ेगा एवं जीडीपी का 6% शिक्षा पर व्यय किया जाना आधारभूत संरचनाओं के विकास में आवश्यक में उपयोगी कदम है।मल्टी इंट्री एंड मल्टी एग्जिट का कॉन्सेप्ट समय एवं ऊर्जा को सही दिशा में साकार करने में एक सकारात्मक कदम के रूप में अपनी भूमिका सुनिश्चित करेगी।
विशिष्ट अतिथि इन्द्रानिल मन्ना ने 5 +3+ 3 +4 की संरचना पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की शिक्षा की दशा व दिशा को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न क्षेत्रों का सविस्तार वर्णन किया।
कार्यक्रम का विषय प्रवेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ विजय कुमार सिंह के द्वारा कराया गया एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के डीन ऑफ इंजीनियिंग प्रोफेसर श्रीधर बी डांडिन ने किया।
इस राष्ट्रीय वेबीनार में देश के विभिन्न भागों से सैकड़ों कुलपति, प्रति कुलपति, प्राचार्य, शिक्षक, शिक्षाविद, रिसर्च स्कॉलर आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ रिया मुखर्जी एवं प्रोफेसर संजीव बजाज के द्वारा किया गया। वेबिनार में आए विभिन्न प्रश्नों का वाचन प्रोफेसर राहुल वत्स के द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी डॉ प्रदीप वर्मा, कुलसचिव डॉ विजय कुमार सिंह, बिना आईडी एवं सीएस प्रोफेसर संजीव बजाज, महादेवी बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग और क्लीनिकल टेक्नोलॉजी की प्राचार्या सुबानी बाड़ा, मुख्य वित्त पदाधिकारी नरहरिदास, कार्मिक एवं प्रशासनिक प्रबंधक मनीष कुमार, नर्सिंग कोऑर्डिनेटर आशुतोष द्विवेदी, प्रो श्रीधर बी दांडीन, प्रो राहुल वत्स, डॉ संजीव कुमार सिन्हा, डॉ राधा माधव झा, डॉ पार्थ पाल, डॉ संदीप कुमार, डॉ रिया मुखर्जी, डॉ पूजा मिश्रा, प्रो चन्दन कुमार, प्रो अशोक अस्थाना, प्रो करन प्रताप सिंह, प्रोफ़ेसर मेघा सिन्हा, प्रोफेशन मनीष अग्रवाल, प्रो अमृता सरकार, प्रोफेसर संजीव कुमार, प्रो शुभंकर घटक, प्रोफेसर हनी सिंह, सुभाष नारायण शाहदेव, प्रवीण कुमार, आदित्य रंजन, भारद्वाज शुक्ला, रविन्द्र तिवारी संजय,प्रशांत जमुआर, ऋषिराज जमुआर सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, पदाधिकारी एवं कर्मचारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

 

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