भारती साहित्य परिषद् द्वारा काव्य गोष्ठी आयोजित

बोकारो। साहित्यिक संस्था भारती  साहित्य परिषद् द्वारा विमल कुमार पांडेय के सेक्टर 5 बी स्थित आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्था के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार सुख नंदन सिंह ‘सदय’ की अध्यक्षता व महामंत्री डाॅ नर नारायण तिवारी के संचालन में आयोजित इस काव्य गोष्ठी की शुरुआत मां सरस्वती की तस्वीर पर माल्यार्पण से हुई।

काव्य गोष्ठी  में ललन तिवारी ने ‘कोरोना’ व ‘सर्दी’, डाॅ परमेश्वर भारती ने ‘दो रंगे लोग तिरंगा का सम्मान क्या जाने/कफन भी बेच खाते जो, शहीदी शान क्या जाने’, कमल किशोर सिंह ने ‘मौका परस्त किसान संगठनों ने कर ली तैयारी’, डाॅ नर नारायण तिवारी ने भोजपुरी में किसान आंदोलन’ व हिंदी में ‘दीप के प्रति’, उदय कान्त सिंह ने काव्य गोष्ठी के महत्व पर ‘हमारी ये मुलाकातें हमें संजीवनी देंगी’ व परिवार में बड़े-बुजुर्ग के महत्व व उनकी पीड़ा को दर्शाती अंगिका में ‘ठूंठा पीपर हांफै छै’, अरुण पाठक ने मैथिली में सद्भावना गीत ‘जाति धर्म के नाम पर नहि बांटू इंसान के’, मनोज कुमार निशांत ने ‘कोरोना काल में लोगों की पीड़ा’, डाॅ बलराम दुबे ने ‘मैं बोल रहा हूं’ शीर्षक कविता – ‘इस घात-प्रतिघात से हिला हूं क्योंकि मैं पत्थर का लाल किला हूं’, डाॅ राम नारायण सिंह ने भोजपुरी में ‘परिभाषा’ शीर्षक कविता-‘मच मच करे उ मचान ह/सीमा पर जे ड़ट जाये उहे असली नवजवान ह’  व सुख नंदन सिंह ‘सदय’ ने 26 जनवरी को लाल किले पर किसान संगठनों के हमले पर ‘लाल किला यह लहूलुहान है’ शीर्षक कविता में पुलिस की भूमिका पर ‘होते रहे घायल पर गणतंत्र बचाने में सफल रहे’ व कोरोना संकट पर ‘भारत ने राह दिखाया है, सच कहता हूं दुनिया से यह क्रूर कोरोना जायेगा’ सुनाकर सबकी दाद पाई।
श्री सदय ने अध्यीय वक्तव्य में कहा कि कोरोनाकाल में साहित्यिक गतिविधियां थम सी गयी थी। कुछेक आॅनलाइन आयोजन जरूर हो रहे थे। अब स्थिति में सुधार होने से उम्मीद है इस तरह के आयोजन निरंतर होंगे। धन्यवाद ज्ञापन वी के पाण्डेय ने किया।

 

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