वेदांता इलेक्ट्रोस्टील ने इलेक्ट्रिक वाहनों के रूपान्तरण की ओर बढ़ाए कदम

# 2023 तक 35 छोटी कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की योजना, अगले चरण में बसों का होगा रूपान्तरण
# 2025 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों में रूपान्तरण का लक्ष्य

बोकारोः स्थायित्व के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए, वेदांता इलेक्ट्रोस्टील ने 2023 तक 35 छोटी कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की योजना बनाई है। अगले चरण में कंपनी बसों के रूपान्तरण की योजना भी बना रही है, और 2025 तक इलेक्ट्रिक वाहनों में रूपान्तरण का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

झारखण्ड ने एनर्जी एफिशिएन्सी सर्विसेज़ लिमिटेड के साथ साझेदारी में एक ई-मोबिलिटी प्रोग्राम को भी अपनाया है। झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने रांची में श्रठटछस् के विभिन्न कार्यालयों में 50 इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराने के लिए म्म्ैस् के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत एवं झारखण्ड के ई-मोबिलिटी प्रोग्राम के मद्देनज़र ईएसएल ने 2025 तक पेट्रोल एवं डीज़ल पर चलने वाले पारम्परिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की योजना बनाई है।

पेट्रोल और डीज़ल पर चलने वाले पारम्परिक वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की ईंधन दक्षता अधिक होती है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। साथ ही ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आऐगी क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन कम शोर उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा इन वाहनों में ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, इसलिए इनमें विस्फोट की संभावना बहुत कम होती है। इसके अलावा इनके डिज़ाइन के चलते टक्कर की संभावना भी कम होती है।

शशि भूषण पांडे, अध्यक्ष, मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च सेंटर (एमएसआरसी), बोकारो ने कहा, ‘हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) कम कर समाज के बेहतर सतत विकास के मकसद से पेट्रोलियम प्रोपल्शन इंजन के बदले इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन मैकेनिज्म अपनाने का यह महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रयास है। इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक आबादी वाले शहरों के पर्यावरण के लिए खतरनाक स्मॉग से बच्चे, बूढ़े और कुल मिलाकर पूरी आबादी बचेगी।

ईएसएल ने 2025 तक केवल इलेक्ट्रिक कार और बस उपयोग करने का लक्ष्य रखा है। यह अत्यंत सराहनीय है और सतत मानव विकास की दिशा में बड़ी पहल है। फ्लाई ऐश नहीं पैदा हो इसका विचार भी पर्यावरण अनुकूलन के अनुरूप है क्योंकि अब यह प्रदूषक नहीं बल्कि सीमेंट और मिट्टी के अन्य उत्पाद बनाने में उपयोग का कच्चा माल और हिस्सा भी बन गया है।”

 

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