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Wednesday, March 3rd, 2021

सरला बिरला विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रियान्वयन एवं आत्मनिर्भर भारत विषय पर एक दिवशीय विचार गोष्ठी

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रांची। सरला बिरला विश्वविद्यालय व शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास  के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रियान्वयन एवं आत्मनिर्भर भारत विषय पर एक दिवसीय विचार गोष्ठी आयोजित  किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल भाई कोठारी ,शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के क्षेत्रीय  संयोजक  सह बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य प्रोफेसर विजय कांत दास, सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ गोपाल पाठक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत सह संयोजक प्रोफेसर विजय कुमार सिंह, झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रदीप कुमार मिश्र, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास झारखंड के प्रांत संयोजक श्री अमरकांत झा आदि अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवम सरस्वती वंदना तथा ओंकार ध्वनि के साथ किया गया।

इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के झारखंड के सभी सम्मानित सदस्य एवं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रियान्वयन एवं आत्मनिर्भर भारत क्रियान्वयन समिति के सभी पदाधिकारी एवं राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कई ख्याति प्राप्त कुलपति ,कुलसचिव, शिक्षाविद एवं प्राध्यापकों ने उपस्थित होकर झारखंड में शिक्षा की दशा व दिशा को बदलने वाली नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूर्णत: क्रियान्वित करने की प्रेरणा  प्राप्त की।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं आत्मनिर्भर भारत विषय पर सरला बिरला विश्वविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वाधान में विश्वविद्यालय के सम्मानित कुलपति प्रोफेसर गोपाल पाठक के अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक श्री अतुल भाई कोठारी जी ने कहा की स्वतंत्र भारत की तीसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आत्मनिर्भरता प्रदान करने वाली यह पहली भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा  नीति 2020 है जो पूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से बनाई गई है जो पूर्णत: भारत केंद्रित शिक्षा नीति है।

इस नीति का उद्देश्य ऐसे राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण करना है जो विचार, बौद्धिकता और  कार्य व्यवहार में  पूर्णत: भारतीय हों।

इस नीति में समग्र, सर्वांगीण एवं एकात्मकता की दृष्टि है जिसमें चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया गया है। समस्याएं तो हैं पर हमें समाधान ढूंढना है, उचित समाधान ढूंढ कर ही हम चुनौतियों को अवसर के रूप में बदल सकते हैं। इस नीति में जन्म से लेकर शोध तक की दृष्टि है।  पढ़ाने की पद्धति से लेकर ढांचागत परिवर्तन की बात कही गई है। उच्च शिक्षा में द्विभाषा का प्रावधान किया गया है जिससे शोध कार्य को व्यापक बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने कहा कि नीति बन जाना  सब कुछ नहीं, इसे क्रियान्वित करना बड़ी बात है । बिना इसके क्रियान्वयन के हम इसके उद्देश्यों को साकार नहीं कर सकते। हम सबों के कंधों पर इसे क्रियान्वित करवाने की जिम्मेदारी है।  नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू कर ही हम हर हाल में  पुनः विश्व गुरु बन सकते हैं। नई शिक्षा नीति के माध्यम से भारत को ऐसा ज्ञान संपन्न राष्ट्र बनाना है जिससे विश्व के लोग भारत के ज्ञान की लालसा में पुनः भारत की ओर आने को मजबूर हो जाएं।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर विजय कांत दास ने कहा कि यह एकमात्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति है जो वास्तव में राष्ट्रीय कहलाने लायक है।  राष्ट्रीयता का अर्थ  संस्कृति के साथ लगाव से है। छात्रों के चरित्रवर्धन के लिए विभिन्न गतिविधियों को शामिल करने की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कही गई है। उन्होंने कहा कि इस व्यापक, समग्र एवं संतुलित शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के द्वारा ही भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

अपने अध्यक्षीय भाषण में सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर डॉ गोपाल पाठक ने कहा कि संस्कृति के बिना शिक्षा अधूरी है। शिक्षा में उच्च संस्कार का होना, नैतिकता, ईमानदारी और कर्तव्य भावना का होना आज की महती आवश्यकता है  । शिक्षा का सर्वांगीण विकास शिक्षकों के कंधों पर ही है। जब तक समाज में उच्च आदर्श वाले शिक्षकों का सम्मान नहीं होगा , योग्य व ईमानदार शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाएगी तब तक शिक्षा के वास्तविक सपनों को साकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू हो जाने के बाद मैकाले की चर्चा पूर्णत: समाप्त हो जाएगी। शिक्षक समाज का आईना होता है नई शिक्षा नीति योग्यता आधारित, गुणवत्तायुक्त तथा चरित्रवान शिक्षकों को नियुक्ति पर जोर दिया है जिसे संपूर्ण शिक्षा नीति के रूप में भारत जीवन मूल्यों को समाहित करने वाला शिक्षा नीति कहा जा सकता है।

शिक्षा दान करने के लिए शिक्षको को अग्नि की तरह तप करना होगा तभी भारत पुनः विश्व गुरु बन जाएगा। नई शिक्षा नीति चरित्र ,व्यवहार और व्यक्तित्व पर जोर देती है।

सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर डॉ विजय कुमार सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा को प्रस्तुत किया एवं इंजीनियरिंग के डीन प्रोफेसर श्रीधर भी दांडी ने सरला बिरला द्वारा संचालित नई शिक्षा नीति से संबंधित अभी तक के कार्यों की समीक्षा  रिपोर्ट प्रस्तुत की।

झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रदीप कुमार मिश्र ने छात्र केंद्रित शिक्षा, ज्ञान  आधारित समाज एवं नवाचार युक्त भारत की बात को इस शिक्षा नीति में  स्थान देने की बात कही साथ ही विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति को व्यापक तरीके से लागू करने की बात भी कही।

इस अवसर पर झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ सविता सेंगर, नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ एस एन सिंह, बीआईटी सिंदरी के प्रोफेसर डॉ रंजीत कुमार सिंह , विनोबा भावे विश्वविद्यालय के डीन डॉ एमके  सिंह, एनआईटी जमशेदपुर के प्रोफेसर डॉ रंजीत प्रसाद, श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएन  मुंडा आदि लोगों ने विचार गोष्ठी में अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अशोक अस्थाना के द्वारा किया गया जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत अध्यक्ष प्रो गोपाल जी सहाय ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर प्रो  संजीव बजाज, अजय कुमार, डॉ संदीप कुमार, डॉ संजीव सिन्हा, डॉ सुभानी बारा, डॉ अनुराधा, डॉक्टर संजीव कुमार, डॉ मेघा सिन्हा, डॉ पूजा मिश्रा, प्रो हनी सिंह, प्रो कविता कुमारी, डॉ पार्थ पॉल, डॉ मृदानिश झा, प्रो राजीव रंजन, डॉ भारद्वाज शुक्ल, प्रवीन कुमार,श्री राहुल रंजन, आदित्य रंजन, अमरेंद्र कुमार, गौरव दास, शिखा राय, शालिनी रंजन, स्वागता सुत्रधार आदि उपस्थित थे।

 

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