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Friday, August 19th, 2022
सरला बिरला विश्वविद्यालय में सात दिवसीय फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रारंभ

सरला बिरला विश्वविद्यालय में सात दिवसीय फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रारंभ

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रांची। सरला बिरला विश्वविद्यालय रांची में आईईटीई रांची एवं झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी राँची के संयुक्त तत्वाधान में सात दिवसीय फेकल्टी डेवेलपमेंट प्रोग्राम का विधिवत शुरुवात ऑनलाइन माध्यम से मां सरस्वती की वंदना के साथ किया गया।
इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर डॉ प्रदीप कुमार मिश्रा ने शिक्षक प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षको को अत्याधुनिक ज्ञान एवं तकनीकी से सुसज्जित रहने की आवश्यकता है। शिक्षकों के द्वारा ही अच्छे नागरिक एवं राष्ट्र का पुनर्निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को तकनीकी के साथ-साथ मूल्यआधारित शिक्षा की ओर बढ़ने का अपील किया। शिक्षक का कार्य रोजगार नहीं अपितु यह राष्ट्र सेवा है ।
एक कुशल शिक्षक हर परिस्थिति में प्रसन्नचित एवं कर्तव्यनिष्ठ होकर एक आदर्श जीवन जीता है जिससे आदर्श नागरिक के साथ साथ उत्तम समाज का निर्माण होता है। एक शिक्षक को नालेज को स्किल में बदलने की कला आनी चाहिए।

विशिष्ट अतिथि के रुप में आईईटीई रांची के निदेशक प्रो डॉ के के ठाकुर ने सरला बिरला विश्वविद्यालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया के अंदर चलने वाले इंफॉर्मेशन को नालेज में चेंज की कला शिक्षकों के पास होती है। शिक्षक सदैव प्राचीन ज्ञान एवं नवीन ज्ञान का समन्वय करता है जिससे वैश्विक आवश्यकता के अनुकूल ज्ञानयुक्त योग्य नागरिक का निर्माण हो सके।

कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो डॉ विजय कुमार सिंह ने सप्ताह भर चलने वाले फैकल्टी डवलपमेन्ट प्रोग्राम की व्याख्या करते हुए एक सफल शिक्षक के सभी आवश्यक गुणों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के अंदर प्रलय और विनाश दोनों प्रकार की परिस्थितियों को उत्पन्न करने की क्षमता होती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ गोपाल पाठक ने कहा कि व्यक्ति जीवन पर्यंत शिक्षार्थी बना रहता है। शिक्षक को नित्य प्रति नवीन ज्ञान को ग्रहण करना चाहिए तथा उसे अपने जीवन में आत्मसात कर भावी पीढ़ी में स्थांतरित भी करना चाहिए। एक बेहतर शिक्षक आदर्श आचरण वाला होता है। शिक्षक के आचरण एवं उसके कार्य व्यवहार का प्रत्यक्ष प्रभाव उनके छात्रों पर अवश्य पड़ता है। शिक्षकों को लिप्सा से मुक्त होकर सेवा भावना एवं राष्ट्र निर्माण का भाव लेकर शिक्षण कार्य करना चाहिए। एक शिक्षक ही राष्ट्र का निर्माता होता है। एक सफल शिक्षक जीवन में आने वाली हर चुनौतियों का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहता है।

7 दिन तक चलने वाले इसे कार्यक्रम में 15 अप्रैल को बीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के पूर्वकुलपति प्रोफ़ेसर एस पी सिंह का व्याख्यान होगा। 16 अप्रैल को आई आई आई टी रांची के निदेशक प्रो डॉक्टर विष्णु प्रिये का व्याख्यान होगा।
17 अप्रैल को बी आई टी सिंदरी के निदेशक प्रो डॉक्टर डी के सिंह, तथा 19 अप्रैल को जर्मनी के प्रोफ़ेसर तारकेश् डोरा पी के व्याख्यान होंगे। 20 अप्रैल को विधिवत समापन सत्र आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ पूजा मिश्रा के द्वारा किया गया। उक्त कार्यक्रम में डीन प्रो श्रीधर बी दण्डिण प्रो संजीव बाजाज, डॉ संदीप कुमार,डॉ आलोकेश बनर्जी,डॉ मेघा सिन्हा,डॉ संजीव सिन्हा,डॉ पार्थो पाल एवं सरला बिरला विश्वविद्यालय, झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विश्वविद्यालय के सैकड़ों प्रतिभागी उपस्थित रहे। स्वागत अभिभाषण एवं परिचय पत्र डॉ मृदानिश झा द्वारा प्रस्तुत किया गया । धन्यवाद ज्ञापन डॉ राधा माधव झा ने प्रस्तुत किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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