‘एक शाम मो. रफी के नाम’

dscn0411बोकारो। बोकारो के कलाकारों व संगीतप्रेमियों ने फिल्म संगीत के प्रख्यात पार्श्वगायक मो. रफी की पुण्यतिथि के अवसर पर बीती शाम ‘एक शाम मो. रफी के नाम’ कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें सुरमयी श्रद्धांजलि दी। सेक्टर 12 बी आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत अरुण पाठक, रंजू सिंह, रमण कुमार, पूर्णेन्दु कुमार सिंह, ललन पांडे, प्रभा देवी, दीपक कुमार राय, अर्पणा राय, महेश कुमार सिंह व मनन कुमार ने मो. रफी साहब के चित्र पर पुष्पार्चन कर की। गायक अरुण पाठक ने कहा कि मो. रफी हरदिल अज़ीज गायक थे। उनकी गायकी बेमिसाल थी। उन्होंने दर्द, उमंग, मस्ती, अल्हड़पन सभी रस के गीतों को गाकर अपार ख्याति अर्जित की। रमण कुमार ने कहा कि रफी साहब के गाए गीतों की लोकप्रियता आज भी चरम पर है। सिने संगीत को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान प्रशंसनीय रहा।

संगीत संध्या में गायक अरुण पाठक ने ‘जाने बहार हुस्न तेरा बेमिसाल है…’, ‘मैं निगाहें तेरे चेहरे से हटाउं कैसे…’, ‘मन रे तू काहे न धीर धरे…’, ‘मुझे भूल जाना अगर हो सके…’ आदि एकल गीतों के साथ रंजू सिंह के साथ युगलगीतों ‘वो जब याद आए बहुत याद आए…’, ‘ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं हम क्या करें…’ सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। रमण कुमार ने ‘झूमता सावन…’, ‘ज़िन्दगी तो बेवफा है….’ व रंजू सिंह के साथ ‘याद में तेरी जाग-जाग के हम…’, ‘यूं ही तुम मुझसे बात करती हो…’ आदि गीतों की प्रस्तुति से सबको आनंदित किया।

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