भारत ने ‘वासेनार व्यवस्था’ के अध्यक्षता की कमान संभाली आज औपचारिक रूप से संभाली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत, वास्सेनार व्यवस्था की अध्यक्षता 01 वर्ष के लिए करेगा, वास्सेनार व्यवस्था के माध्यम से सदस्य देश हथियारों के हस्तांतरण पर सूचना का आदान-प्रदान करते हैं।
यह पहली बार है जब भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है। भारत, वासेनार व्यवस्था में 8 दिसंबर 2017 को 42वें हिस्सेदार देश के रूप में शामिल हुआ था। वासेनार व्यवस्था क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और निर्यात नियंत्रण संबंधित तंत्र है। इसका मकसद परंपरागत हथियारों और दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं एवं प्रौद्योगिकी के निर्यात पर नियंत्रण करना है।
‘वास्सेनार अरेंजमेंट’ एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण तंत्र है. अध्यक्षता के दौरान भारत, इसके सदस्य देशों के साथ करीबी सहयोग करने और क्षेत्रीय एवंअंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता में योगदान करनेको तत्पर है।
‘वास्सेनार अरेंजमेंट’ की स्थापना पारंपरिक हथियारों और दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण में पारदर्शिता लाने के लिए किया गया था. जिसकी मदद से देकर क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सकता है। साथ ही यह परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियारों और उपकरणों के निर्यात और हस्तांतरण के लिए एक जिम्मेदार अंतर्राष्ट्रीय समूह में से एक है।
इसकी 1996 में बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रणों के लिए शीत युद्ध-काल की समन्वय समिति की जगह लेने के लिए अस्तित्व में आया था। इसका नाम द हेग के एक उपनगर वास्सेनार से आया था जहाँ 1995 में इस तरह के बहुपक्षीय सहयोग को शुरू करने का समझौता हुआ था।

