भारत का बड़ा कदम: 3D-प्रिंटेड वेदर स्टेशन (Automatic Weather Stations), फरवरी से दिल्ली में तैनाती
नई दिल्ली: भारत ने मौसम विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए 3D-प्रिंटेड स्वदेशी ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS- Automatic Weather Stations) का निर्माण शुरू कर दिया है। यह पहल Mission Mausam के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य देशभर में मौसम निगरानी को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर सटीक पूर्वानुमान सुनिश्चित करना है।
इन अत्याधुनिक वेदर स्टेशनों की पहली खेप फरवरी से दिल्ली में स्थापित की जाएगी। इसके बाद इन्हें चरणबद्ध तरीके से अन्य बड़े शहरों और दूर-दराज़ के इलाकों में लगाया जाएगा, ताकि लंबे समय से चली आ रही मौसम संबंधी डेटा की कमी को दूर किया जा सके।
यह राष्ट्रीय योजना Indian Institute of Tropical Meteorology, पुणे के नेतृत्व में चलाई जा रही है, जो Ministry of Earth Sciences के अधीन कार्य करता है। करीब ₹2,000 करोड़ की लागत वाली मिशन मौसम का लक्ष्य भारत को मौसम और जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक सक्षम बनाना है।
In a first, Indian scientists are developing indigenous Automatic Weather Stations (#AWS) using 3D printing to strengthen last-mile weather observations. The first set of these stations will be installed in the national capital #Delhi this February. ⬇️ https://t.co/o5jNiwgiMB
— Srishti Choudhary (@Srish__T) January 3, 2026
क्या है उद्देश्य?
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव M Ravichandran ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के मौसम अवलोकन नेटवर्क का इतना विस्तार करना है कि कोई भी डेटा गैप न बचे। अधिक स्थानों पर तापमान, हवा, नमी और वर्षा जैसे मानकों की रिकॉर्डिंग से स्थानीय स्तर पर ज्यादा सटीक मौसम पूर्वानुमान संभव होगा। उन्होंने बताया कि ये नए वेदर स्टेशन सोलर पावर से चलेंगे।
पहले बड़े शहरों पर फोकस
मिशन मौसम के तहत शहरी मौसम विज्ञान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में आने वाले छह महीनों के भीतर ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों और रडार सिस्टम का तेज़ी से विस्तार किया जाएगा। इससे हीटवेव, अचानक भारी बारिश और शहरी बाढ़ जैसी घटनाओं को बेहतर तरीके से समझा और पूर्वानुमानित किया जा सकेगा।
कैसे काम करेगा 3D-प्रिंटेड AWS?
पारंपरिक मौसम केंद्रों की तुलना में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन बिना मानवीय हस्तक्षेप के लगातार मौसम डेटा मापते और भेजते हैं, जिससे लागत कम होती है और रियल-टाइम जानकारी मिलती है। 3D प्रिंटिंग तकनीक के उपयोग से इन स्टेशनों का निर्माण तेज़, सस्ता और बड़े पैमाने पर करना आसान होगा।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन मशीनों की सटीकता के लिए सही कैलिब्रेशन और वैज्ञानिक तरीके से इंस्टॉलेशन बेहद ज़रूरी है। हाल ही में India Meteorological Department के कुछ AWS में असामान्य तापमान दर्ज होने की घटनाएं सामने आई थीं, जिनका कारण खराब सेंसर या गलत स्थानों पर इंस्टॉलेशन पाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, नए 3D-प्रिंटेड वेदर स्टेशन शुरुआती चरण में मौजूदा प्रणालियों के साथ चलेंगे, ताकि गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
मिशन मौसम के तहत आधुनिक तकनीक, बेहतर कंप्यूटिंग क्षमता और उन्नत मॉडलिंग के साथ इन नए वेदर स्टेशनों की तैनाती से भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

