नई दिल्ली: लाल किला (Red Fort) मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण कार विस्फोट की जांच में एक अहम सुराग सामने आया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि धमाके में इस्तेमाल हुई सफेद Hyundai i20 कार के ड्राइवर उमर मोहम्मद उर्फ उमर नबी को हवाला चैनलों के जरिए ₹20 लाख भेजे गए थे। इसी रकम का इस्तेमाल उसने हरियाणा के नूंह इलाके से बड़े पैमाने पर उर्वरक खरीदने में किया, जिसे बाद में विस्फोटक सामग्री बनाने में लगाया गया।
जांच एजेंसियों ने हवाला नेटवर्क से जुड़े कई ऑपरेटरों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि फंडिंग का पूरा रूट और मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
Red Fort Blast: तीन घंटे पार्क रही कार, अचानक हुआ जोरदार धमाका
सोमवार शाम करीब 6:52 बजे लाल किला पार्किंग एरिया में अचानक उस i20 कार में विस्फोट हुआ, जिसमें अब तक 13 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक धमाका इतना जोरदार था कि आसपास खड़ी कई गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
CCTV फुटेज के मुताबिक कार लगभग तीन घंटे तक पार्क रही थी। इससे पहले वह हरियाणा से दिल्ली में दाखिल हुई थी। पुलिस ने पार्किंग में प्रवेश करने वाली सभी गाड़ियों का पूरा रिकॉर्ड तैयार कर लिया है और संदिग्ध की तस्वीर अन्य ड्राइवरों को दिखाकर उसकी गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।
‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश
इस ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले ही एजेंसियों ने एक हाई-प्रोफाइल “व्हाइट-कॉलर” आतंकी नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन डॉक्टरों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 2,900 किलो विस्फोटक बरामद किया गया था। यह नेटवर्क जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ था।
फरीदाबाद की अल-फला यूनिवर्सिटी से जुड़े दो पूर्व डॉक्टर — मुज़म्मिल गनई और शाहींन सईद — भी गिरफ्तार किए गए हैं। विश्वविद्यालय परिसर से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट मिला है। UGC और NAAC द्वारा गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किए जाने के बाद यूनिवर्सिटी पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के दो केस दर्ज किए गए हैं।
एन्क्रिप्टेड ऐप से होती थी बातचीत
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक स्विस-आधारित एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते थे, जिसके जरिए मैप्स, लोकेशन और ऑपरेशन प्लान साझा किए जाते थे। साइबर टीमें इस ऐप के डेटा की जांच कर रही हैं, ताकि नेटवर्क की पूरी संरचना सामने लाई जा सके।
जांच एजेंसियों की नजर अब किस पर?
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हवाला फंडिंग के जरिए आए 20 लाख रुपये का सोर्स
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नूंह से खरीदे गए उर्वरकों की सप्लाई चेन
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CCTV में दिखा कार का पूरा रूट
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अल-फला यूनिवर्सिटी की भूमिका और पकड़े गए डॉक्टरों के लिंक
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एन्क्रिप्टेड चैट ऐप से मिले डिजिटल सुराग
जांच तेजी से कई राज्यों में फैल रही है, और एजेंसियों के अनुसार यह केस सिर्फ एक कार विस्फोट नहीं, बल्कि एक बेहद संगठित और पेशेवर तरीके से चली मल्टी-स्टेट टेरर फाइनेंसिंग ऑपरेशन की ओर इशारा करता है।

