नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय / ED) की जांच में बड़ा दावा सामने आया है कि पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला घोटाले (WB Coal Scam) से निकली हजारों करोड़ रुपये की अवैध नकदी का एक हिस्सा चुनावी रणनीति कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) की गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया।
8 जनवरी को ED ने पश्चिम बंगाल और दिल्ली में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई कथित अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई।
कोयला सिंडिकेट और ‘काली कमाई’ का खेल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी की गई। इस पूरे नेटवर्क का संचालन अनूप माझी उर्फ लाला नामक व्यक्ति कर रहा था, जिसे कई सरकारी अफसरों, पुलिस और अन्य प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिला होने का आरोप है।
ED claims coal scam funds from Anup Majhi were routed via hawala to IPAC, allegedly used for TMC’s Goa poll strategy, linking scam money to political campaign financing.#CoatGateHeat #TMC #Scam #EDRaids #iPAC| @AnjileeIstwal pic.twitter.com/EhK1bJTLt7
— IndiaToday (@IndiaToday) January 8, 2026
अवैध रूप से निकाला गया कोयला विभिन्न जिलों की फैक्ट्रियों को बेचा गया, जिससे भारी मात्रा में नकद पैसा इकट्ठा हुआ।
ED का दावा: ₹2,742 करोड़ की अवैध कमाई
ED का कहना है कि 2017 से 2020 के बीच इस घोटाले से ₹2,742 करोड़ से ज्यादा की ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ पैदा हुई। यह पैसा ज्यादातर नकद में वसूला गया और अलग-अलग चैनलों से आगे भेजा गया।
इसी रकम में से करीब ₹20 करोड़ I-PAC तक पहुंचाए जाने का आरोप है।
हवाला के जरिए चुनावी खर्च!
ED के अनुसार, यह ₹20 करोड़ कोलकाता से गोवा तक हवाला नेटवर्क के जरिए भेजे गए। आरोप है कि 2021–22 के दौरान इस रकम का इस्तेमाल चुनावी आयोजनों, इवेंट मैनेजमेंट और राजनीतिक अभियानों में किया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि गोवा में यह पैसा I-PAC से जुड़ी कंपनियों और लोगों के जरिए खर्च हुआ। I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन इस मामले में जांच के दायरे में हैं।
गिरफ्तारियां, आरोपी और राजनीतिक कनेक्शन
अब तक इस मामले में 40 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। अनूप माझी को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। एक पूर्व पुलिस अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया है, जिस पर कोयला ट्रकों और नकदी की सुरक्षित आवाजाही में मदद करने का आरोप है।
ED ने कुछ वरिष्ठ ECL अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
सियासी भूचाल
छापेमारी के बाद मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। ED ने अदालत में ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह घोटाला सत्ता के संरक्षण में चला और अब सच्चाई सामने आ रही है।
ED के दावों के मुताबिक, यह सिर्फ कोयले की चोरी का मामला नहीं, बल्कि काले धन से चुनावी मशीनरी चलाने का आरोप है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मामला और ज्यादा विस्फोटक होता जा रहा है।

