ओस्लो से ओवल ऑफिस तक: क्या Venezuela की ये सारी घटनाएँ आपस में जुड़ी हैं?

by Ashis Sinha
दुनिया ने एक चौंकाने वाला दृश्य देखा। वेनेजुएला (Venezuela) की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (Machado) व्हाइट हाउस पहुँचीं और अपना 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Prize) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को सौंप दिया। यह महज़ एक औपचारिक भेंट नहीं थी—बल्कि वेनेजुएला के सत्ता परिवर्तन पर ‘जीत की मुहर’ जैसा संदेश था।

आधी रात का ऑपरेशन: कैसे गिरे मादुरो (Maduro)
ठीक 14 दिन पहले, 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने अचानक सैन्य कार्रवाई की। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को राष्ट्रपति महल से गिरफ्तार कर लिया गया। वर्षों से अर्थव्यवस्था को जकड़े ‘तानाशाही शासन’ का अंत एक झटके में हो गया।

क्या विपक्ष ने दी थी अंदरूनी जानकारी?
सबसे बड़ा सवाल यही उठा—इस कार्रवाई में विपक्ष की भूमिका कितनी थी?
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खुफिया इनपुट: रिपोर्ट्स का दावा है कि मचाडो के नेतृत्व वाले गुट ने मादुरो के गुप्त ठिकानों और गतिविधियों की सटीक जानकारी साझा की।
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राजनीतिक समर्थन: गिरफ्तारी के तुरंत बाद विपक्ष का जश्न और इसे “मानवता की जीत” कहना, कार्रवाई के प्रति उनके समर्थन की ओर इशारा करता है।
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वैश्विक नैरेटिव: विपक्ष ने इस कदम को “आजादी की जंग” बताकर पेश किया—जिससे ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नैतिक ढाल मिली।
घटनाक्रम—एक नज़र में
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मादुरो की गिरफ्तारी: सत्ता में खालीपन
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कार्यवाहक सरकार: देश संभालने को अस्थायी व्यवस्था
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सड़कों पर जश्न: विपक्षी समर्थकों का उत्सव
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नोबेल का हस्तांतरण: ट्रंप के प्रति सार्वजनिक आभार
ट्रंप और नोबेल
ट्रंप वर्षों से नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा करते रहे हैं और 2017 से इसे लेकर अपनी दिलचस्पी जताते आए हैं। मचाडो ने वही मेडल उस समय सौंपा, जब अमेरिकी सेना की कार्रवाई ने कराकस की सत्ता तस्वीर बदल दी।
मचाडो का संदेश साफ था—“यह सम्मान आपकी हमारी आज़ादी के प्रति प्रतिबद्धता के लिए है।”
मादुरो युग समाप्त हो चुका है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है। क्या कार्यवाहक सरकार लोकतंत्र बहाल कर पाएगी? और क्या शांति व सैन्य शक्ति के बीच की रेखा और धुंधली होगी?
मचाडो द्वारा ट्रंप को सौंपा गया नोबेल मेडल 2026 की वैश्विक राजनीति का यही कठोर सच उजागर करता है।


