Trump का ‘Board of Peace’ : संयुक्त राष्ट्र (UN) की वैश्विक भूमिका को खुली चुनौती

Trump का ‘Board of Peace’ : संयुक्त राष्ट्र (UN) की वैश्विक भूमिका को खुली चुनौती
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Trump’s Board of Peace क्या है? (Board of Peace 2026 Explained)

by Ashis Sinha

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप (Trump) ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान दावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Pace) नामक एक नई वैश्विक संस्था की शुरुआत की। इस चार्टर पर 22 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए। यह मंच युद्धग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना, पुनर्निर्माण और राजनीतिक स्थिरता के लिए बनाया गया है, जिसकी पहली प्राथमिकता गाजा (Gaza) पुनर्निर्माण बताई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र (UN) की वैश्विक शांति-व्यवस्था को सीधे चुनौती देती है।


कितने देश जुड़े?

  • 50 देशों को निमंत्रण भेजा गया
  • करीब 35 देशों ने सैद्धांतिक सहमति दी
  • 23 देशों ने दावोस में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर सदस्यता ली

बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ने वाले देश (23)

  • अल्बानिया
  • अर्जेंटीना
  • आर्मेनिया
  • अज़रबैजान
  • बहरीन
  • बेलारूस
  • बुल्गारिया
  • मिस्र
  • हंगरी
  • इंडोनेशिया
  • इज़राइल
  • जॉर्डन
  • कज़ाखस्तान
  • कोसोवो
  • मोरक्को
  • पाकिस्तान
  • पराग्वे
  • क़तर
  • सऊदी अरब
  • तुर्किये
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • उज़्बेकिस्तान
  • वियतनाम

निमंत्रित लेकिन अब तक सहमति नहीं

  • यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन)
  • जर्मनी
  • चीन
  • रूस
  • भारत
  • जापान
  • थाईलैंड
  • सिंगापुर
  • ग्रीस
  • इटली
  • यूक्रेन

जो देश बाहर रहे / शामिल होने से इनकार किया

  • फ्रांस
  • नॉर्वे
  • स्वीडन
  • स्पेन
  • स्लोवेनिया

कनाडा का निमंत्रण बाद में वापस ले लिया गया।

संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ ट्रंप क्यों?

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र को

  • धीमा,
  • नौकरशाही से ग्रस्त,
  • राजनीति से प्रभावित
    और
  • असफल संस्था

बताते रहे हैं।

उनका मानना है कि UN प्रस्ताव तो पास करता है, लेकिन युद्ध रोकने में नाकाम रहता है। इसी कारण ट्रंप एक छोटे, तेज़ और अमेरिका-नेतृत्व वाले मंच के ज़रिए वैश्विक फैसले लेना चाहते हैं।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ में:

  • कोई वीटो सिस्टम नहीं है
  • कोई स्थायी सदस्य नहीं
  • निर्णय सीमित देशों द्वारा तेज़ी से लिए जाएंगे

यह व्यवस्था UN की जगह नई वैश्विक शक्ति संरचना बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।


‘बोर्ड ऑफ पीस’ केवल शांति मंच नहीं, बल्कि वैश्विक सत्ता संतुलन में बदलाव की घोषणा है।  अब यह देखना होगा कि यह मंच शांति का माध्यम बनता है या शक्ति-राजनीति का नया औज़ार।

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