यादों के आंगन में फिर लौटे पुराने साथी

यादों के आंगन में फिर लौटे पुराने साथी
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सेक्टर-1 उवि के 1984 बैच का वनभोज सह मिलन समारोह आयोजित

by Deepak Kumar

बोकारो। समय का पहिया भले ही तेज़ी से घूम गया हो, लेकिन दोस्ती का बंधन आज भी उतना ही मजबूत है। कुछ ऐसा ही भावनात्मक नज़ारा रविवार को सिटी पार्क स्थित वनभोज स्थल पर देखने को मिला, जहाँ सेक्टर-1 उच्च विद्यालय के 1984 बैच के पूर्व छात्र-छात्राओं ने सपरिवार भव्य रीयूनियन पिकनिक का आयोजन किया।

सालों बाद एक-दूसरे से मिलकर कई साथी भावुक हो उठे और पुरानी यादों को ताज़ा किया। कोई अपनी शरारतें याद कर रहा था तो कोई अपने करियर और परिवार की उपलब्धियाँ साझा कर रहा था। इस अवसर पर म्यूजिकल चेयर, अंताक्षरी जैसे खेलों ने सभी को फिर से छात्र जीवन में लौटा दिया।

स्कूली दिनों की यादों को लिखित रूप देकर सोनी जारूहार वर्मा ने उन्हें एक पुस्तिका के रूप में संजोया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी साथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और माहौल को संगीतमय बना दिया।

कार्यक्रम में राघवेंद्र नारायण सूर्यवंशी, रीता सिंह, सोनी जारूहार, सुनीता सिंह, संजय कुमार, अजय श्रीवास्तव, वशिष्ठ कुमार, राजकृष्ण राज, मनोज विशाल, यशपाल सिंह, अनिल कुमार मिश्रा, यशपाल सिंह (बड़ा), ठाकुरदास मंडल, प्रणव कुमार बब्बन, नवीन कुमार बैसखियार, सुरेश कुमार गुप्ता, अंजलि पंडित, नरेश रवानी, रखाल गोप, विकास कुमार, विजय कुमार ठाकुर, अंबिका महतो, दीपक कुमार उर्फ ‘कौव्वाल साहब’, संत कुमार, संजय सिंह, पंचानन सिंह, राजीव कुमार, सीधेश्वर कुमार, प्रदीप कुमार गुप्ता, राजेश, नलनीकांत तिवारी, अनिल, निताई और सुशील सहित कई साथी उपस्थित रहे।

उड़ीसा, बिहार सहित अन्य राज्यों से भी कई पूर्व छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए। कुछ साथियों ने पुराने गीतों पर नृत्य किया तो कुछ ने कविताएँ सुनाकर समां बाँध दिया। इस दौरान उन साथियों को भी याद किया गया जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।

आयोजन को लेकर राजकृष्ण राज, वशिष्ठ, यशपाल और सुरेश गुप्ता ने संयुक्त रूप से बताया कि पिकनिक का मुख्य उद्देश्य भागदौड़ भरी ज़िंदगी से कुछ पल निकालकर अपनी जड़ों की ओर लौटना और दोस्ती के रिश्तों को और मज़बूत करना है।

दोपहर के भोजन के बाद सभी ने सामूहिक फोटो खिंचवाया और सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से संपर्क में बने रहने का संकल्प लिया। इसके बाद सभी साथियों ने अपने विद्यालय का भी भ्रमण किया। जर्जर भवन को देखकर सभी भावुक हो उठे।

शाम ढलते-ढलते सभी मित्र सुनहरी यादों को समेटे, भारी मन से विदा हुए।

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