नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे (MM Naravane) के अप्रकाशित संस्मरण के कथित रूप से ऑनलाइन सामने आने और अनिवार्य मंजूरी के बिना प्रसारित होने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले ने जांच के साथ-साथ राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट और ऑनलाइन लिस्टिंग से संकेत मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया कि Four Stars of Destiny शीर्षक वाली पुस्तक को आधिकारिक स्वीकृति से पहले साझा और प्रचारित किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि पांडुलिपि का टाइपसेट PDF संस्करण कुछ वेबसाइटों पर उपलब्ध था, जिससे अनधिकृत प्रसार को लेकर चिंता बढ़ी।
जांचकर्ता कॉपीराइट उल्लंघन, अवैध वितरण और प्रक्रियागत चूक की संभावनाओं की पड़ताल कर रहे हैं — विशेषकर यह कि मंजूरी से पहले सामग्री सार्वजनिक मंचों तक कैसे पहुंची। अधिकारियों ने यह भी नोट किया कि कुछ ऑनलाइन रिटेल या मार्केटिंग प्लेटफॉर्म पर पुस्तक का कवर ऐसे प्रदर्शित किया गया मानो वह बिक्री के लिए उपलब्ध हो, जबकि औपचारिक प्रकाशन नहीं हुआ था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंपी गई है। टीमें कथित लीक के स्रोत का पता लगाने, सामग्री अपलोड या प्रसारित करने वालों की पहचान करने और प्रसार की पूरी श्रृंखला स्थापित करने में जुटी हैं।
We wish to make it clear that the book has not gone into publication. No copies of the book – in print or digital form – have been published, distributed, sold, or otherwise made available to the public, says Penguin Random House India on former Army Chief Gen Naravane’s book,… https://t.co/gNUaiQz2Rq
— Amit Malviya (@amitmalviya) February 9, 2026
2024 से रुका प्रकाशन
यह विवाद पुस्तक के रुके हुए प्रकाशन से जुड़े सवालों को फिर सामने लाता है। 2024 में Four Stars of Destiny — जिसमें जनरल नरवणे के लगभग चार दशक लंबे सैन्य करियर का विवरण है — जारी होने वाली थी और बुकस्टोर प्री-ऑर्डर भी ले रहे थे। लेकिन लॉन्च रोक दिया गया और दो साल बाद भी पुस्तक अप्रकाशित है।
बताया जाता है कि संस्मरण में सेकंड लेफ्टिनेंट से लेकर सेना प्रमुख बनने तक की उनकी यात्रा का उल्लेख है, जिसमें 1962 के बाद चीन के साथ भारत के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य टकराव के दौरान उनका नेतृत्व भी शामिल है। पांडुलिपि के प्रकाशन की तैयारी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा किए जाने की जानकारी है।
राहुल गांधी तक अप्रकाशित किताब कैसे पहुंची?
संसद के भीतर विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हाथ में इस अप्रकाशित पुस्तक की मुद्रित प्रति देखे जाने से विवाद और गहरा गया है। लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान गांधी ने इसके अंशों का हवाला दिया, लेकिन उन्हें यह सामग्री कैसे मिली, इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
विपक्ष का कहना है कि यह विवाद सदन में उठाए गए मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है, जबकि सत्तापक्ष के नेताओं ने अनिवार्य मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही पांडुलिपि तक पहुंच पर जवाबदेही की मांग की है। जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि प्रति कथित रूप से लीक डिजिटल फाइलों, संपादकीय प्रूफ कॉपी या अन्य अनौपचारिक माध्यमों से आई या नहीं।
संसद में सियासी टकराव
यह मुद्दा बजट सत्र के बाद उस समय भड़का जब गांधी ने लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े अंशों का संदर्भ दिया। उनके कुछ मिनट के वक्तव्य पर सत्ता पक्ष की ओर से तीखी आपत्तियां दर्ज की गईं और वरिष्ठ मंत्रियों ने अनधिकृत सामग्री के हवाले पर सवाल उठाए।
अध्यक्ष द्वारा आगे उद्धरण देने से रोके जाने के बाद सदन में कई बार व्यवधान हुआ और सत्र के दौरान कई सांसदों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हुई। गांधी ने बाद में आरोप लगाया कि उन्हें मुद्दा उठाने से रोका गया और पुस्तक व संबंधित रिपोर्टिंग पर बोलने का अवसर नहीं दिया गया।
पुलिस का कहना है कि कथित अनधिकृत प्रसार की जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

