12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश (Bangladesh) एक साथ 13वें संसदीय चुनाव और जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत-संग्रह कराने जा रहा है। यह प्रक्रिया केवल सरकार गठन का अभ्यास नहीं, बल्कि राजनीतिक हिंसा, तीखे ध्रुवीकरण और मीडिया पर बढ़ते दबाव के बीच लोकतंत्र की अब तक की सबसे कठिन परीक्षा मानी जा रही है। ऐसे निर्णायक समय में अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से व्यक्तिगत व पार्टी हितों से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देने की अपील की है।
लगभग 17 करोड़ नागरिकों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर यूनुस ने कहा कि जीत और हार लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन चुनाव के बाद सभी को एक न्यायपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। उन्होंने मतदाताओं से शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण भागीदारी का आह्वान किया तथा विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं से आगे आने की अपील की, जिन्हें अतीत में कई बार मतदान के अवसरों से वंचित रहना पड़ा है।
चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ढाका की अंतरिम सरकार ने भारत सहित नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, कुवैत, मोरक्को, नाइजीरिया और रोमानिया को चुनाव पर्यवेक्षक भेजने का निमंत्रण दिया है। इसके साथ ही यूरोपीय संघ, कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरिएट, सार्क ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन, एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शन्स, ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन, एसएनएएस अफ्रीका, पोलिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स, इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट और नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट जैसी वैश्विक संस्थाएँ भी पर्यवेक्षक भेजने पर सहमत हुई हैं। आम चुनाव और जनमत-संग्रह को कवर करने के लिए पत्रकारों समेत लगभग 540 विदेशी पर्यवेक्षकों के बांग्लादेश आने की संभावना है।
बीबीसी, अल जज़ीरा, एबीसी, डॉयचे वेले, एनएचके, रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान इस चुनावी प्रक्रिया पर नज़र रखे हुए हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने देश की आंतरिक अस्थिरता को देखते हुए चुनाव पर्यवेक्षक न भेजने का निर्णय लिया है, जिसकी पुष्टि महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने की है।
इसी बीच न्यूयॉर्क स्थित कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से चुनाव से पहले प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। CPJ ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी और जातीय पार्टी को पत्र भेजकर चुनावी अवधि में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताने, हिंसा और धमकियों को रोकने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के दुरुपयोग से बचने का आग्रह किया है। उल्लेखनीय है कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
CPJ के अनुसार, चुनाव-पूर्व माहौल में पत्रकारों के लिए खतरे तेज़ी से बढ़े हैं। बिना पुख्ता सत्यापन के आरोपों में गिरफ्तारी, मीडिया कर्मियों पर हमलों में दंडहीनता और हिंसा के मामलों में कार्रवाई के अभाव ने भय और आत्म-सेंसरशिप का वातावरण बना दिया है। बांग्लादेश एशिया के उन देशों में शामिल है जहाँ पत्रकारों को जेल भेजे जाने के मामले अधिक हैं। वर्तमान में पाँच पत्रकार हत्या और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जेल में हैं, जिन्हें उनकी रिपोर्टिंग और कथित राजनीतिक जुड़ाव से जोड़ा जा रहा है।
CPJ के एशिया-प्रशांत कार्यक्रम समन्वयक कुणाल मजूमदार के अनुसार, दिसंबर 2025 में द डेली स्टार और प्रोथोम एलो के कार्यालयों पर हमले, पत्रकारों के खिलाफ डिजिटल उत्पीड़न और समन्वित नफ़रत अभियानों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। उनका कहना है कि पिछली हसीना सरकार के दौरान कानूनों के दुरुपयोग से पत्रकारों को डराने की प्रवृत्ति बढ़ी थी और प्रशासन में बदलाव के बावजूद यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने आधिकारिक सूचनाओं और प्रेस ब्रीफिंग तक निर्बाध पहुँच को वास्तविक सुधार की अनिवार्य शर्त बताया।
पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ-साथ घरेलू स्तर पर भी चिंता गहराती जा रही है। जिनेवा स्थित प्रेस एम्बलम कैंपेन (PEC) ने 5 जनवरी को जेसोर में बंगाली हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी (45) की हत्या की कड़ी निंदा की और दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग की। 26 जनवरी को नरसिंगडी में उगाही गिरोह के हमले में 12 पत्रकार घायल हुए। बांग्लादेश एडिटर्स काउंसिल ने चुनाव के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरिम सरकार, चुनाव आयोग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से ठोस कदम उठाने की अपील की है।
राजनीतिक परिदृश्य में पश्चिमी मीडिया का आकलन है कि BNP-नेतृत्व वाला गठबंधन आगामी चुनाव में आगे है और पार्टी चेयरमैन तारिक रहमान को अगला प्रधानमंत्री माना जा रहा है। 25 दिसंबर को 17 वर्षों के निर्वासन के बाद ब्रिटेन से लौटने पर लाखों लोगों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने “मेरे पास एक प्लान है” के नारे के साथ रोजगार सृजन, तकनीकी शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और खेल को प्राथमिकता देने का वादा किया। बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा ज़िया का 30 दिसंबर को 80 वर्ष की आयु में निधन हुआ, जिसके बाद तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया।
द डिप्लोमैट, टाइम, ब्लूमबर्ग और द इकोनॉमिस्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों और विश्लेषणों के आधार पर तारिक रहमान को चुनावी दौड़ में सबसे आगे बताया है। उन्होंने कानून के शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपसी विश्वास पर आधारित एक नए बांग्लादेश की परिकल्पना प्रस्तुत की है। स्पष्ट है कि 2026 का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का प्रश्न नहीं है; यह तय करेगा कि हिंसा, दबाव और अस्थिरता के बीच बांग्लादेश का लोकतंत्र स्वयं को कितनी मजबूती से स्थापित कर पाता है।
(लेखक पूर्वी भारत के वरिष्ठ पत्रकार हैं)


