Pax Silica Pact: AI और चिप सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए India-US की बड़ी पहल

Pax Silica Pact: AI और चिप सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए India-US की बड़ी पहल
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नई दिल्ली: भारत (India) और अमेरिका (US) ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) के दौरान पैक्स सिलिका घोषणा (Pax Silica) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति देने वाला अहम कदम माना जा रहा है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का लक्ष्य वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना है। उन्होंने बताया कि भारतीय इंजीनियर अब अत्याधुनिक दो-नैनोमीटर चिप डिजाइन कर रहे हैं और उद्योग को आवश्यक 10 लाख से अधिक कुशल पेशेवर देश के भीतर ही उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने यह भी बताया कि देश के 300 से अधिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र चिप डिजाइन गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़े हैं।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका साझेदारी को “असीम संभावनाओं वाला” बताया। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर चिप निर्माण और एआई तैनाती तक पूरे सिलिकॉन वैल्यू चेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करेगा और भरोसेमंद औद्योगिक साझेदारियों को बढ़ावा देगा।

गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि गूगल भारत और अमेरिका के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाने पर गर्व महसूस करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों की साझेदारी समावेशी और परिवर्तनकारी एआई भविष्य को आकार देने में निर्णायक साबित होगी। पिचाई ने सुरक्षित सप्लाई चेन की जरूरत पर बल देते हुए बताया कि गूगल उत्पाद, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्केलिंग के माध्यम से इस विकास को पूरा समर्थन दे रहा है।

क्या है Pax Silica?

पैक्स सिलिका अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक सिलिकॉन इकोसिस्टम — जैसे क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर निर्माण और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर — को सुरक्षित और मजबूत बनाना है। इसका मकसद भरोसेमंद देशों को साथ लाकर एक लचीला और नवाचार-आधारित तकनीकी नेटवर्क तैयार करना है।

इस पहल की शुरुआत दिसंबर 2025 में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और इज़राइल जैसे देशों के साथ हुई थी। ऐसे में भारत का इसमें शामिल होना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों अहम है भारत की भागीदारी

भारत का यह कदम ऐसे समय आया है जब पश्चिमी देश चिप्स, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और एआई ढांचे के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। वैश्विक सप्लाई चेन में चीन की मजबूत पकड़ और समय-समय पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों ने कई देशों की चिंता बढ़ाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पैक्स सिलिका में शामिल होकर भारत को नए निवेश आकर्षित करने, सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट का बड़ा हिस्सा हासिल करने का मौका मिलेगा। साथ ही यह कदम एआई और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाओं को भी तेज करेगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता 21वीं सदी की तकनीकी और आर्थिक व्यवस्था को आकार देने की दिशा में भारत और अमेरिका की साझा रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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