News Desk: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच United Nations Security Council (UNSC) में होर्मुज़ (Hormuz) जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर लाया गया प्रस्ताव पास नहीं हो सका। Russia और China ने वीटो कर दिया, जबकि Pakistan ने मतदान से दूरी बनाई।
क्या था प्रस्ताव?
यह प्रस्ताव Bahrain ने पेश किया था और इसे अमेरिका समेत कई पश्चिमी और खाड़ी देशों का समर्थन हासिल था। इसमें मांग की गई थी कि Strait of Hormuz को तुरंत खोला जाए और क्षेत्र में तनाव कम किया जाए।
यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है।
11 वोट समर्थन में, फिर भी प्रस्ताव खारिज
15 सदस्यीय परिषद में इस प्रस्ताव को 11 देशों का समर्थन मिला, लेकिन रूस और चीन के वीटो के चलते यह पारित नहीं हो सका। यह नतीजा साफ दिखाता है कि इस मुद्दे पर वैश्विक शक्तियों के बीच गहरा मतभेद है।
रूस-चीन ने क्यों किया विरोध?
रूस के प्रतिनिधि Vassily Nebenzia ने कहा कि प्रस्ताव “एकतरफा” है और इससे शांति वार्ता के प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है।
वहीं चीन के राजदूत Fu Cong ने भी कहा कि मसौदा क्षेत्र की जटिल परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं दर्शाता और केवल दबाव बनाने की कोशिश करता है।
अमेरिका ने जताई नाराजगी
अमेरिका के दूत Mike Waltz ने रूस और चीन के वीटो की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “रुकावट डालने वाला कदम” बताया। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को खतरा बढ़ेगा।
पाकिस्तान ने अपनाई संतुलित नीति
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान का रुख खास रहा। पाकिस्तान ने मतदान से दूरी बनाते हुए साफ किया कि वह किसी पक्ष में खुलकर नहीं जाना चाहता।
पाकिस्तान के प्रतिनिधि Asim Iftikhar Ahmad ने कहा कि हालात गंभीर हैं, लेकिन बातचीत के रास्ते खुले रहना जरूरी है।
कई बार बदला गया मसौदा, फिर भी नहीं बनी बात
जानकारी के मुताबिक, प्रस्ताव को पास कराने के लिए इसमें कई बदलाव किए गए थे। यहां तक कि पहले शामिल कुछ सख्त प्रावधान—जैसे बल प्रयोग की अनुमति—भी हटा दिए गए। इसके बावजूद रूस और चीन संतुष्ट नहीं हुए।
आगे क्या?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर जारी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। UNSC में सहमति न बन पाना यह दिखाता है कि बड़े देशों के बीच मतभेद अभी भी बहुत गहरे हैं।
ऐसे में अब नजरें कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं—क्या बातचीत से रास्ता निकलेगा या संकट और गहराएगा।

