International Malangia Festival: ‘एक कमल नोर मे’ नाटक में उत्कृष्ट अभिनय कला से छोड़ी अविस्मरणीय छाप
नई दिल्ली/बोकारो। राजधानी दिल्ली (Delhi) में चल रहे चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय मलंगिया महोत्सव (International Malangia Festival) में बोकारो (Bokaro) के रंगकर्मियों ने ऐसा रंग जमाया कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मिथिला सांस्कृतिक परिषद (Mithila Sanskritik Parishad) के कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर बोकारो की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से स्थापित कर दिया।
24 से 28 अप्रैल 2026 तक आयोजित इस विश्वस्तरीय महोत्सव में, मलंगिया फाउंडेशन और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के संयुक्त तत्वावधान में परिषद की प्रस्तुति ‘एक कमल नोर मे’ चर्चा का केंद्र बन गई। कलाकारों ने मंच पर ऐसा जीवंत प्रदर्शन किया कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे। शफीक सभागार में चल रहे इस चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन में लेखक महेंद्र मलंगिया के 35 नाटकों का मंचन देश-विदेश के कलाकारों द्वारा किया जा रहा है, जिसे एक संभावित विश्व कीर्तिमान के रूप में भी देखा जा रहा है।
वरिष्ठ रंगकर्मी शंभु झा के निर्देशन में प्रस्तुत इस मैथिली नाटक ने समाज के संवेदनशील पहलुओं को बेबाकी से सामने रखा। ‘एक कमल नोर मे’ आधुनिक समय की उन सीतारूपी महिलाओं की मर्मस्पर्शी कहानी कहता है, जो अपने दर्द को छिपाकर परिवार को संभालती हैं और समाज की कुरीतियों का सामना करती हैं। नाटक की केंद्रीय पात्र ‘माला’ के जरिए निःसंतान महिला की पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा और पति के दूसरे विवाह की त्रासदी को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
नाटक ने केवल संवेदनाएं ही नहीं जगाईं, बल्कि धार्मिक आडंबर और सामाजिक रूढ़ियों पर भी तीखा प्रहार किया। ज्योतिषी की भूमिका में वरिष्ठ कलाकार सुनील मोहन ठाकुर ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके संवाद और मंच उपस्थिति ने प्रस्तुति को नई ऊंचाई दी।
अन्य कलाकारों में आशुतोष झा (राजेश), रोहित चंचल (मुकेश), चंद्रकांत मिश्र ‘बुलन’ (डॉक्टर साहेब), गिरजानंद मिश्र (पम्पू), प्रीति प्रिया (माला) और कस्तूरी सिन्हा (सरस्वती) ने भी अपने अभिनय से दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वयं निर्देशक शंभु झा ने संभाली, जबकि कृपानंद सिन्हा का सहयोग उल्लेखनीय रहा।
इस शानदार प्रस्तुति के बाद मिथिला सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष जय प्रकाश चौधरी, महासचिव नीरज चौधरी और सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक समेत सभी पदाधिकारियों ने कलाकारों को बधाई देते हुए इसे बोकारो के लिए गौरव का क्षण बताया।

