नव ठाकुरिया
असम चुनाव 2026 (Assam Election) के एग्जिट पोल (exit poll) में BJP गठबंधन की बड़ी जीत के संकेत, लेकिन ज़मीनी स्तर पर चुनौतियाँ बरकरार। जानें सीट अनुमान, वोटिंग प्रतिशत और राजनीतिक समीकरण।
गुवाहाटी (Assam): 29 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान समाप्त होते ही असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए एग्जिट पोल सामने आने लगे। लगभग सभी प्रमुख सर्वेक्षणों ने असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन की सत्ता में वापसी का संकेत दिया है। हालांकि, 126 सदस्यीय विधानसभा में सीटों को लेकर अनुमानों में बड़ा अंतर देखा गया—कहीं 70 सीटें तो कहीं 100 से अधिक सीटों का अनुमान।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के लिए अधिकांश एग्जिट पोल बहुमत के जादुई आंकड़े 64 से काफी नीचे ही रहे। कई सर्वेक्षणों में यह भी संकेत मिला कि BJP अपने दम पर ही बहुमत हासिल कर सकती है, जबकि कांग्रेस की सीटें लगभग आधी रहने का अनुमान है।
पीपल्स पल्स के एग्जिट पोल के अनुसार, नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। इसमें BJP को 69–73 सीटें, असम गण परिषद (AGP) को 8–11 सीटें और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को 8–9 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं कांग्रेस को 22–26 सीटों तक सीमित रहने की संभावना जताई गई है। अन्य दलों—जैसे AIUDF, UPPL, CPI(M) और निर्दलीय—को सीमित सफलता मिल सकती है।
‘टुडेज़ चाणक्य’ ने BJP-नेतृत्व वाले गठबंधन को 93–111 सीटें मिलने का अनुमान जताया है, जबकि विपक्षी गठबंधन को 14–32 सीटें और अन्य को नगण्य सीटें मिलने की संभावना है। JVC के सर्वे में NDA को 88–101 सीटें, विपक्ष को 23–33 और अन्य को लगभग 5 सीटें दी गई हैं।
Metrize ने NDA के लिए 85–95 सीटें, विपक्ष के लिए 25–32 और अन्य के लिए 6–12 सीटों का अनुमान लगाया है। Kamakhya Analytics ने भी सत्ताधारी गठबंधन को 85–95 सीटें दी हैं, जबकि विपक्ष को 26–39 सीटें मिलने की संभावना जताई है। Axis My India के मुताबिक NDA को 88–100 सीटें मिल सकती हैं, जिसमें BJP अकेले 70–80 सीटें जीत सकती है, जबकि कांग्रेस 22–30 सीटों तक सिमट सकती है।
इसके अलावा Poll Diary ने NDA को 86–101 सीटें, People’s Insight ने BJP को 88–96 सीटें और P-MARQ ने NDA को 82–94 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। Janmat के अनुसार NDA को 87–98 सीटें और कांग्रेस गठबंधन को 29–30 सीटें मिल सकती हैं।
असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने बताया कि 4 मई को मतगणना के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। सुबह 8 बजे से 35 मतगणना जिलों में स्थापित 40 केंद्रों पर एक साथ वोटों की गिनती शुरू होगी। इसके लिए 126 पर्यवेक्षक, 2,348 सूक्ष्म-पर्यवेक्षक और 5,981 मतगणना कर्मी तैनात किए गए हैं। परिणाम शाम तक आने की संभावना है।
गोयल ने इसे ऐतिहासिक चुनाव बताते हुए कहा कि राज्य के 2.50 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से 85.91 प्रतिशत ने मतदान किया, जो पिछले चुनावों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से 126 विधायकों का चयन होना है।
हालांकि एग्जिट पोल BJP के लिए उत्साहजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर चुनौतियाँ बरकरार हैं। पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत भी सामने आए हैं। राज्य मंत्री रंजीत कुमार दास ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल विपक्षी उम्मीदवारों से ही नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर “साज़िशकर्ताओं” से भी जूझना पड़ा।
इसके बाद BJP असम अध्यक्ष दिलीप सैकिया को सार्वजनिक अपील जारी कर नेताओं और कार्यकर्ताओं को संयम बरतने की सलाह देनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की परंपरा ऐसे आरोप-प्रत्यारोप की अनुमति नहीं देती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुछ सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।
BJP ने 2016 में 15 वर्षों से सत्ता में रही तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को हटाकर असम में पहली बार सरकार बनाई थी, जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। 2021 में BJP-नेतृत्व वाले गठबंधन ने 75 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी और हिमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बने।
सरमा, जो पहले कांग्रेस में मंत्री रह चुके हैं, 2015 में BJP में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास, जनकल्याण योजनाओं, अतिक्रमण हटाने के अभियान और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता जैसे कई कदम उठाए हैं। हालांकि, उनके कुछ बयानों—खासतौर पर अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर—विवाद भी खड़े हुए हैं।
हाल ही में बांग्लादेश ने सरमा की “पुश-बैक” नीति संबंधी टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए अनुचित बताया। सरमा ने एक साक्षात्कार में कहा था कि यह नीति रात के समय लागू की जाती है और तब तक जारी रहेगी, जब तक घुसपैठियों के लिए असम में रहना मुश्किल न हो जाए।
(लेखक पूर्वी भारत के वरिष्ठ पत्रकार)


