by Ashis Sinha
G7 Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बैठकों से कई बड़े नतीजे सामने आए। भारत-यूके FTA को अंतिम रूप मिला, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई, कनाडा से रिश्तों में सुधार के संकेत मिले और भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर बुलंद किया।
France के एवियन-ले-बैंस (Évian-les-Bains) में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारत अब सिर्फ वैश्विक मंचों पर मौजूद नहीं रहता, बल्कि एजेंडा भी तय करता है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और यूक्रेन समेत कई देशों के नेताओं के साथ हुई उनकी द्विपक्षीय बैठकों ने व्यापार, रक्षा, तकनीक और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया।
1. भारत-यूके FTA पर लगी मुहर, 15 जुलाई से होगा लागू
G7 के दौरान सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिया जाना। प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच हुई बैठक में इस ऐतिहासिक समझौते के 15 जुलाई से लागू होने का रास्ता साफ हुआ।
इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाई मिलेगी। भारतीय निर्यातकों को बड़ा बाजार मिलेगा, जबकि निवेश, शिक्षा, तकनीक और सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलेंगे।
2. अमेरिका के साथ रिश्तों को मिली “नई गति और नई ऊर्जा”
प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर थी। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, व्यापार, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, नई तकनीकों और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की।
बैठक के बाद मोदी ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में “नई गति और नई ऊर्जा” आई है। यह संकेत है कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होने वाली है।
3. कनाडा के साथ रिश्तों में दिखी नई शुरुआत
काफी समय से तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे भारत-कनाडा संबंधों में भी G7 के दौरान नरमी दिखाई दी। प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात को रिश्तों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जिससे भविष्य में संबंधों के सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है।
4. जर्मनी के साथ रणनीतिक साझेदारी और मजबूत
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ हुई बैठक में व्यापार, रक्षा उत्पादन, हरित ऊर्जा और उन्नत तकनीक पर विशेष जोर रहा।
यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी के साथ बढ़ता सहयोग भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
5. यूक्रेन मुद्दे पर भारत का स्पष्ट संदेश—शांति ही समाधान
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात में प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से निकल सकता है।
भारत ने एक बार फिर खुद को ऐसे देश के रूप में पेश किया जो संवाद, शांति और स्थिरता का समर्थक है।
6. ग्लोबल साउथ की आवाज़ बना भारत
G7 में मोदी की लगभग हर बैठक में विकासशील देशों की चिंताएं प्रमुख रहीं। जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक तक पहुंच और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज़ बुलंद की।
इससे साफ हुआ कि भारत अब विकसित और विकासशील देशों के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभा रहा है।
7. व्यापार, तकनीक और सप्लाई चेन पर रहा सबसे ज्यादा जोर
मोदी की अधिकांश बैठकों में तीन मुद्दे सबसे ज्यादा उभरकर सामने आए—
- व्यापार और निवेश बढ़ाना
- उभरती तकनीकों में सहयोग
- सुरक्षित और भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन बनाना
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारत को अब सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रही हैं।
भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का प्रदर्शन
G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की वैश्विक भूमिका लगातार बढ़ रही है। ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक FTA, अमेरिका के साथ मजबूत होती साझेदारी, कनाडा के साथ रिश्तों में सुधार और यूक्रेन पर शांति का संदेश—इन सबने भारत की कूटनीतिक ताकत को नई पहचान दी है।
G7 से सबसे बड़ा संदेश यही निकला कि आज वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़ न सिर्फ सुनी जा रही है, बल्कि उसे गंभीरता से भी लिया जा रहा है।


