अरुण पाठक
Bokaro: मिथिला सांस्कृतिक परिषद् (Mithila Sanskritik Parishad), बोकारो की ओर से रविवार देर शाम मिथिलांचल का पारंपरिक कोजागरा (Kojagara ) उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सेक्टर-4ई स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के विद्यापति सभागार में आयोजित इस समारोह में मैथिली गीत-संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम का उद्घाटन मिथिला सांस्कृतिक परिषद् के उपाध्यक्ष श्रवण कुमार झा, महासचिव नीरज चौधरी, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष एवं परिषद् निदेशक मंडल के संयोजक राजेंद्र कुमार, विद्यालय के उपाध्यक्ष बटोही कुंवर, सचिव दिलीप कुमार झा, संयुक्त सचिव सुनील मोहन ठाकुर, मिथिला महिला समिति की अध्यक्ष पूनम मिश्रा, परिषद् के वित्त सचिव मिहिर मोहन ठाकुर तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक ने संयुक्त रूप से किया।
Kojagara मिथिला की समृद्ध परंपरा का प्रतीक : नीरज चौधरी
स्वागत भाषण में परिषद् के महासचिव नीरज चौधरी ने कोजागरा पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिथिलांचल में आश्विन पूर्णिमा के अवसर पर कोजागरा उत्सव मनाने की प्राचीन परंपरा है। इस अवसर पर घरों में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है। नवविवाहित वर के घर कोजागरा का आयोजन विशेष उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मिथिला की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी लोगों को आगे आने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का आह्वान किया।
मैथिली गीतों ने बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत अरुण पाठक की सुमधुर भगवती वंदना ‘जय जय भैरवि असुर भयाउनि…’ से हुई। इसके बाद उन्होंने कोजागरा की पारंपरिक छटा को दर्शाते हुए ‘आई पूर्णिमा उगल ईजोरिया, चकमक चमकै चान यौ, मिथिला के पावनि ई कोजगरा, बांटू पान मखान यौ…’ गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अरुण पाठक ने ‘तोरा आंचर सं बहके पवन…’ गीत की प्रस्तुति से भी दर्शकों की सराहना बटोरी। वहीं, आंचल पाठक ने ‘कोजागरा गीत भैया, कोजगरा मे भारक मोजगरा मे, बाबूजी बांटथि मखान…’ और ‘गोल मोल सं चांद गगन में…’ जैसे गीतों से उत्सव के पारंपरिक रंग को और गहरा किया। उन्होंने भगवती वंदना ‘जगदंब अहीं अवलंब हमर हे, माय अहां बिनु आस ककर…’ की भावपूर्ण प्रस्तुति भी दी।
गीत-संगीत की इन प्रस्तुतियों ने सभागार में उपस्थित लोगों को मिथिला की सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ दिया। कार्यक्रम में उमेश कुमार झा ने कीबोर्ड और हर्षित झा ने तबले पर संगत की।
गणमान्य लोगों सहित सैकड़ों लोग हुए शामिल
कार्यक्रम का संचालन परिषद् के सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के संयुक्त सचिव सुनील मोहन ठाकुर ने प्रस्तुत किया।
उत्सव के सफल आयोजन में रवींद्र झा, सुमित कुमार झा, विश्वनाथ झा और गोविन्द कुमार झा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर परिषद् के निदेशक मंडल के सदस्य कृष्ण चन्द्र झा और विजय कुमार झा के अलावा विजय शंकर मल्लिक सुधापति, मिहिर कुमार झा राजू, अविनाश झा अवि, डॉ. यूसी झी, विनय दरिहरे, शंभू झा, श्रीमोहन झा, शैलेन्द्र कुमार मिश्र, सुदीप कुमार ठाकुर, बीएन ठाकुर, ए.के. मिश्र, डी.सी. मिश्रा, मीरा मिश्रा, पूनम झा, कालीकांत मिश्र, सोनी पाठक, अरविन्द मिश्रा, पशुपति झा, एस.के. झा, राजीव कंठ, गंगेश कुमार पाठक, एस.के. सिंह, गणेश झा, विजय कुमार मिश्र, कन्हैया झा, भृगुनंदन ठाकुर, ऋषिकेष चौधरी और अमरजीत चौधरी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
मैथिली गीतों, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामूहिक सहभागिता से सजे इस आयोजन ने बोकारो में मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।

