नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार या बदले गए कंटेंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर सख्त प्रावधान लागू किए हैं।
संशोधित नियमों के तहत अब एआई टूल्स से तैयार या संशोधित सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। उपयोगकर्ताओं को यह बताना होगा कि उनकी पोस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाई गई है या उसमें बदलाव किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नए प्रावधानों में इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया है कि नोटिस मिलने के तीन घंटे के भीतर कुछ श्रेणी की गैरकानूनी या हानिकारक सामग्री हटानी होगी। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को अपने नियमों और यूजर एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि अवैध सामग्री साझा करने पर पोस्ट हटाने, अकाउंट निलंबन या समाप्ति जैसी कार्रवाई हो सकती है।
ये दिशानिर्देश 20 फरवरी से लागू होंगे।
हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों ने इतने कम समय-सीमा के व्यावहारिक पक्ष पर सवाल उठाए हैं। टेक्नोलॉजी कानून विशेषज्ञ आकाश कर्माकर ने रॉयटर्स से कहा कि तीन घंटे में सामग्री हटाना व्यवहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसमें उचित समीक्षा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।
विश्लेषकों का मानना है कि इन नियमों से सरकार और प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों — जिनमें एलन मस्क के स्वामित्व वाला X भी शामिल है — के बीच तनाव और बढ़ सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बड़ी संख्या में कंटेंट हटाने के आदेश दिए जाने पर डिजिटल अधिकार समूहों ने भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है।

