बांग्लादेश में दंगे, हिंदू युवक की भीड़ द्वारा हत्या
News Desk: बांग्लादेश (Bangladesh) एक बार फिर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल की चपेट में है। विवादित राजनीतिक नेता शरीफ उस्मान हादी (Hadi) की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। हादी की मौत गुरुवार रात हुई—उन्हें छह दिन पहले ढाका में चुनावी अभियान के दौरान अज्ञात नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी।
हादी इंक़िलाब मंच के प्रवक्ता थे और जुलाई–अगस्त 2024 के उस आंदोलन के बाद चर्चा में आए थे, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बाहर कर दिया था। उनकी तीखी भारत-विरोधी बयानबाज़ी भी उन्हें एक विवादास्पद चेहरा बनाती थी। अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले उनकी हत्या ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
The Bangladeshi capital of Dhaka was on edge, with the offices of several newspapers still reeling from a night of protests, triggered by the killing of popular youth leader Sharif Osman Hadi.#Bangladesh #Bangladeshnews #BangladeshProtests pic.twitter.com/I704ofz9Kv
— WION (@WIONews) December 19, 2025
ढाका में मीडिया दफ्तर निशाने पर
हादी की मौत की पुष्टि होते ही उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए। देखते-ही-देखते प्रदर्शन हिंसक हो गए। ढाका में देश के दो प्रमुख अख़बारों—द डेली स्टार और प्रथम आलो—के दफ्तरों पर हमला किया गया और आगजनी की गई।
डेली स्टार के दफ्तर में उस समय पत्रकार और कर्मचारी मौजूद थे। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दफ्तर में मौजूद 25 पत्रकारों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। दमकल विभाग की छह गाड़ियों ने करीब रात 1:40 बजे आग पर काबू पाया।
कावारन बाज़ार इलाके में प्रदर्शनकारियों ने प्रथम आलो के दफ्तर को घेर लिया। पुलिस भीड़ को तुरंत नियंत्रित नहीं कर पाई। लाठियों और लोहे की रॉड से लैस उपद्रवियों ने इमारत में तोड़फोड़ की और अधिकांश शीशे तोड़ दिए।
चटगांव में भारतीय मिशन के बाहर प्रदर्शन
हिंसा ढाका तक सीमित नहीं रही। बंदरगाह शहर चटगांव में प्रदर्शनकारियों ने भारतीय सहायक उच्चायोग के बाहर नारेबाज़ी की। इस दौरान अवामी लीग और भारत-विरोधी नारे लगाए गए।
हालात बिगड़ते देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और भीड़ को मिशन परिसर से दूर हटाया। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन सुरक्षा बल तैनात हैं।
मयमनसिंह में हिंदू युवक की भीड़ द्वारा हत्या
इसी बीच, देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करने वाली एक और घटना सामने आई। बीबीसी बांग्ला के मुताबिक, मयमनसिंह जिले में एक हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को आग के हवाले कर दिया।
घटना भालुका उपज़िला के डुबालिया पारा इलाके की है। मृतक की पहचान दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है, जो एक स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था और किराए के मकान में रहता था। आरोप है कि भीड़ ने उस पर “धर्म-निंदा” का आरोप लगाया।
भालुका थाने के ड्यूटी ऑफिसर रिपन मिया ने बीबीसी बांग्ला से कहा,
“गुरुवार रात करीब 9 बजे लोगों के एक समूह ने उसे पकड़ा, बेरहमी से पीटा और फिर उसका शव पेड़ से बांधकर जला दिया।”
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए मयमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है। फिलहाल कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि मृतक के परिजनों के सामने आने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजशाही में आगजनी
राजशाही में भी हिंसा की खबरें आई हैं। यहां प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के संस्थापक नेता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े एक आवास को आग के हवाले कर दिया, जिससे भारी नुकसान हुआ।
अंतरिम सरकार ने किया राजकीय शोक का ऐलान
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत पर एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने हादी को “निडर योद्धा” और “फासीवाद व वर्चस्व के खिलाफ संघर्ष का अमर सिपाही” बताया। उनके इस बयान पर देश में तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।
बढ़ता भारत-विरोध और अस्थिरता
शेख हसीना के भारत जाने के बाद से बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं लगातार तेज हुई हैं। हाल ही में “जुलाई ओइक्या” (जुलाई एकता) के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ढाका में भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च किया और हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की।
अगले साल प्रस्तावित आम चुनाव से पहले बांग्लादेश आज गंभीर राजनीतिक अस्थिरता, सड़क हिंसा, मीडिया पर हमलों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गहरे संकट से जूझ रहा है—जिसका असर न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।

