चंडीगढ़: हरियाणा (Haryana) की दो राज्यसभा (Rajyasabha) सीटों के लिए हुए चुनाव का परिणाम सोमवार देर रात नाटकीय घटनाक्रम और लंबी जाँच-पड़ताल के बाद सामने आया। अंततः Sanjay Bhatia (BJP) और Karamvir Singh Boudh (Congress) ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की। परिणाम मंगलवार तड़के लगभग 1:10 बजे घोषित किया गया, जबकि मतगणना शाम 5 बजे शुरू होने वाली थी।
गणना में कई घंटों की देरी इसलिए हुई क्योंकि कुछ विधायकों के वोट की गोपनीयता और वैधता को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। मामला Election Commission of India तक पहुँचा और देर रात तक बैलेट पेपर की जाँच चलती रही।
वोट की गोपनीयता को लेकर विवाद
मतदान समाप्त होने से पहले ही आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। हरियाणा के मंत्री Gaurav Gautam ने आरोप लगाया कि टोहाना के विधायक Paramvir Singh के वोट की गोपनीयता भंग हुई है। वहीं मंत्री Krishn Bedi ने ऐलनाबाद के विधायक Bharat Singh Beniwal के मतदान को लेकर आपत्ति जताई।
इसके जवाब में कांग्रेस विधायक Bharat Bhushan Batra ने मंत्री Anil Vij के खिलाफ भी ऐसी ही शिकायत दर्ज कराई। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव की निष्पक्षता पर चिंता जताई। कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar से भी मिला।
लंबी जाँच के बाद चुनाव आयोग ने परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया, जबकि बेनीवाल और विज के वोट को वैध माना। इसके बाद रात 10:25 बजे के करीब मतगणना शुरू हो सकी।
विधानसभा का गणित
हरियाणा विधानसभा के 90 विधायकों में से 88 ने मतदान किया। Indian National Lok Dal के दो विधायक—Arjun Chautala और Aditya Devi Lal—मतदान में शामिल नहीं हुए। पार्टी ने कहा कि उसने जनता की भावना को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।
जाँच के दौरान 5 मत रद्द कर दिए गए—चार कांग्रेस के और एक भाजपा का। इसके बाद 83 वैध वोट बचे। एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) के तहत जीत के लिए आवश्यक कोटा 27.67 वोट तय हुआ।
बेहद करीबी मुकाबला
भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया को 39 प्रथम वरीयता वोट मिले और वे आसानी से कोटा पार कर गए। उनके अतिरिक्त वोट भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार Satish Nandal को स्थानांतरित हुए।
कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध को 28 प्रथम वरीयता वोट मिले, जो जीत के लिए जरूरी संख्या से थोड़ा अधिक थे। वहीं नंदल को कुल 27.33 वोट मिले और वे मात्र 0.67 वोट से पीछे रह गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा का रद्द हुआ वोट मान्य हो जाता या INLD के दोनों विधायक मतदान में हिस्सा लेते, तो परिणाम अलग भी हो सकता था।
क्रॉस वोटिंग के आरोप
चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोप भी सामने आए। बताया गया कि पांच कांग्रेस विधायकों ने नंदल के पक्ष में मतदान किया, जबकि कांग्रेस के चार वोट रद्द हो गए।
कांग्रेस की ओर से चुनाव रणनीति संभाल रहे नेता प्रतिपक्ष Bhupender Singh Hooda ने इसे कठिन मुकाबला बताते हुए कहा कि पार्टी ने “आग की परीक्षा” पार की है।
वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने दावा किया कि लगभग 25 प्रतिशत कांग्रेस विधायकों ने अपना वोट ट्रांसफर कर दिया, और INLD पर कांग्रेस की “बी-टीम” की तरह काम करने का आरोप लगाया।
नतीजों में झलकता सियासी समीकरण
कुल मिलाकर हरियाणा का यह राज्यसभा चुनाव बेहद रोमांचक और करीबी मुकाबला साबित हुआ। लंबी जाँच, रद्द हुए मत और क्रॉस वोटिंग के आरोपों के बीच आखिरकार भाजपा और कांग्रेस—दोनों ने एक-एक सीट अपने नाम कर ली।

