आसमान (Sky) से समंदर (Sea) तक: बेंगलुरु में बना भारत का पहला एम्फीबियस ड्रोन
Bengaluru: भारत (India) की उभरती हुई डीप-टेक और ड्रोन तकनीक को एक नई दिशा देते हुए बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप ने देश का पहला एम्फीबियस ड्रोन (Amphibious Drone) ‘अवतार’ (AVATAAR) विकसित किया है। इस ड्रोन की खासियत यह है कि यह सिर्फ आसमान में उड़ान ही नहीं भरता, बल्कि जरूरत पड़ने पर पानी में उतरकर उसके भीतर भी काम कर सकता है। मिशन पूरा करने के बाद यह फिर से पानी की सतह से उड़ान भर सकता है।
यह तकनीक ड्रोन और अंडरवॉटर रोबोटिक्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर एक नई क्षमता प्रदान करती है, जिससे एक ही मशीन हवा और पानी—दोनों जगहों पर निगरानी और निरीक्षण कर सकती है।
हवा (Air) से पानी (Water) तक बिना रुकावट मिशन
‘अवतार’ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सामान्य क्वाडकॉप्टर ड्रोन की तरह उड़ान भर सकता है। मिशन के दौरान यह किसी जलाशय, समुद्र या झील की सतह पर उतरकर पानी में गोता लगा सकता है और वहां आवश्यक कार्य कर सकता है।
अंडरवॉटर ऑपरेशन पूरा होने के बाद यह दोबारा पानी की सतह पर आता है और फिर से हवा में उड़ान भरकर अपना मिशन जारी रख सकता है।
इस तरह एक ही ड्रोन से हवाई निगरानी और पानी के भीतर की जांच संभव हो जाती है, जिसके लिए पहले अलग-अलग मशीनों की जरूरत पड़ती थी।
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समुद्री परिस्थितियों के लिए खास तकनीक
ड्रोन को समुद्री वातावरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके ढांचे में ऐसे विशेष पदार्थों का इस्तेमाल किया गया है जो खारे पानी और जंग से सुरक्षित रहते हैं। इसके इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को भी पूरी तरह सील किया गया है ताकि पानी या नमी से नुकसान न हो।
पानी के अंदर नेविगेशन के लिए इसमें आधुनिक सेंसर और सोनार तकनीक का उपयोग किया गया है। जीपीएस पानी के अंदर काम नहीं करता, इसलिए यह ड्रोन सोनार इमेजिंग, ध्वनि तरंगों और विशेष नेविगेशन सिस्टम की मदद से अपने आसपास के वातावरण को पहचानता है और रास्ता तय करता है।
इसके अलावा इसमें कैमरे, एलईडी लाइट और अन्य सेंसर लगाए गए हैं, जिससे यह कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में भी निरीक्षण कर सकता है।
ड्रोन में सुरक्षा से जुड़े फीचर भी दिए गए हैं। उदाहरण के लिए यदि बैटरी का स्तर कम हो तो यह पानी में गोता नहीं लगाएगा, जिससे मिशन के दौरान किसी तरह का जोखिम न हो।
प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण
‘अवतार’ अभी उन्नत प्रोटोटाइप चरण में है और इसका कई बार परीक्षण किया जा चुका है। इंजीनियरों ने खुले पानी में इसके ट्रायल किए हैं, जहां इसने हवा से पानी में उतरने और फिर दोबारा उड़ान भरने की क्षमता को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया।
इन परीक्षणों के दौरान इसके प्रोपल्शन सिस्टम, वाटरप्रूफ इलेक्ट्रॉनिक्स और अंडरवॉटर नेविगेशन तकनीक की जांच की गई। शुरुआती परिणामों ने दिखाया है कि यह ड्रोन एक ही मिशन में हवाई निगरानी और पानी के भीतर निरीक्षण—दोनों काम करने में सक्षम है।
अब कंपनी इसके प्रदर्शन, बैटरी क्षमता और सेंसर सिस्टम को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है।
उत्पादन की दिशा में अगला कदम
स्टार्टअप फिलहाल इस तकनीक को प्री-प्रोडक्शन चरण तक ले जाने की तैयारी कर रहा है। इंजीनियर मिशन की अवधि बढ़ाने, बैटरी दक्षता सुधारने और ड्रोन की पेलोड क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
अगले चरण में सीमित स्तर पर इसका उत्पादन शुरू करने की योजना है, ताकि इसे विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सके। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों, ऊर्जा क्षेत्र और अनुसंधान संस्थानों ने इस तकनीक में खास रुचि दिखाई है।
रक्षा, उद्योग और शोध में उपयोग
‘अवतार’ जैसे ड्रोन कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
संभावित उपयोगों में शामिल हैं:
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समुद्री और तटीय निगरानी
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नौसेना और बंदरगाह सुरक्षा
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समुद्र के भीतर पाइपलाइन और केबल का निरीक्षण
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तेल और गैस प्लेटफॉर्म की जांच
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समुद्री पर्यावरण और जैव विविधता का अध्ययन
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आपदा या दुर्घटना के बाद खोज और बचाव अभियान
ऐसी तकनीक विशेष रूप से उन स्थितियों में उपयोगी हो सकती है जहां किसी संदिग्ध गतिविधि की जांच के लिए पहले हवा से निगरानी और फिर पानी के भीतर निरीक्षण करना जरूरी हो।
भारत के लिए तकनीकी उपलब्धि
भारत की समुद्री सीमा हजारों किलोमीटर लंबी है और समुद्री सुरक्षा तथा समुद्री संसाधनों की निगरानी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ‘अवतार’ जैसे उन्नत ड्रोन देश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इस परियोजना से यह भी साफ होता है कि भारतीय स्टार्टअप अब रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंचती है, तो ‘अवतार’ भारत को उन देशों की श्रेणी में खड़ा कर सकता है जो हवा और पानी दोनों में काम करने वाली अगली पीढ़ी की ड्रोन तकनीक विकसित कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
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भारत का पहला एम्फीबियस ड्रोन: बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप ने ‘अवतार’ (AVATAAR) नामक ड्रोन विकसित किया है, जो हवा और पानी दोनों में काम कर सकता है।
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दोहरी क्षमता: यह ड्रोन सामान्य ड्रोन की तरह उड़ सकता है, पानी की सतह पर उतरकर उसमें गोता लगा सकता है और फिर वापस उड़ान भर सकता है।
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उन्नत अंडरवॉटर नेविगेशन: इसमें सोनार सेंसर, ध्वनि आधारित नेविगेशन और कैमरे लगे हैं, जिससे यह कम दृश्यता में भी पानी के भीतर काम कर सकता है।
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समुद्री परिस्थितियों के अनुकूल डिजाइन: इसे जंग-रोधी सामग्री और वाटरप्रूफ इलेक्ट्रॉनिक्स से बनाया गया है ताकि यह खारे पानी में भी सुरक्षित रहे।
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प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण: इसका उन्नत प्रोटोटाइप तैयार हो चुका है और कई फील्ड ट्रायल में हवा से पानी में जाने की क्षमता सफलतापूर्वक प्रदर्शित हुई है।
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उत्पादन की दिशा में तैयारी: कंपनी बैटरी क्षमता, मिशन अवधि और पेलोड क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है ताकि इसे उत्पादन चरण तक ले जाया जा सके।
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कई क्षेत्रों में उपयोग: समुद्री निगरानी, नौसेना सुरक्षा, पानी के भीतर पाइपलाइन व केबल निरीक्षण, समुद्री शोध और आपदा राहत में उपयोगी।
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भारत के डीप-टेक सेक्टर को मजबूती: यह नवाचार भारतीय स्टार्टअप्स की रोबोटिक्स और स्वायत्त तकनीक में बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
