Kashmir: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, जहाँ इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका (US) का दबाव ईरान (Iran) पर लगातार बढ़ रहा है और तेहरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है, दुनिया भर में इस टकराव को लेकर चिंता और आलोचना दोनों सामने आ रही हैं। कई देशों ने खासकर ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को लेकर ईरान की आलोचना की है।
इसी वैश्विक तनाव के बीच, भारत के कश्मीर घाटी से एक मानवीय पहल सामने आई है। घाटी के मुस्लिम समाज के कुछ वर्ग—खासकर शिया मुस्लिम समुदाय—ने ईरान के प्रभावित नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर दान अभियान शुरू किया है, जिसमें सोना, नकद, आभूषण और घरेलू सामान तक शामिल हैं।
Even Kashmiri children are offering their piggy banks as gifts to Iran.
God bless you. pic.twitter.com/OfI6w4rNUb— Iran in India (@Iran_in_India) March 22, 2026
ईद के बाद तेज हुई मुहिम
यह अभियान ईद-उल-फितर के बाद तेजी से आगे बढ़ा। श्रीनगर, बडगाम और बारामूला जैसे इलाकों में जगह-जगह कलेक्शन सेंटर बनाए गए। मस्जिदों के बाहर दान केंद्र लगाए गए और स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर लोगों से सहयोग की अपील की।
इस पहल में भावनात्मक जुड़ाव साफ नजर आया। महिलाओं ने अपने गहने दान किए, जबकि बच्चों ने अपनी बचत और “ईदी” तक इस मुहिम के लिए दे दी।
सोना, नकद और बर्तन—हर तरह की मदद
दान की मात्रा और विविधता इस अभियान की व्यापकता को दर्शाती है। अलग-अलग इलाकों से जो योगदान सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं:
- सोना और चांदी के गहने
- नकद राशि
- तांबे के बर्तन और घरेलू सामान
- निजी बचत और कीमती वस्तुएं
एक चर्चित उदाहरण में, एक विधवा ने वर्षों से संभालकर रखा अपना सोना दान कर दिया—जो इस पहल के पीछे की भावनात्मक गहराई को दर्शाता है।
इस पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए आगा मुजतबा ने इसे ईरान के लोगों के साथ एक मानवीय एकजुटता बताया। इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि समुदाय ने पहले इज़राइल और अमेरिका की कार्रवाइयों के खिलाफ विरोध जताया था, और अब लोग हर संभव तरीके से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि दान या तो सीधे भारत में ईरान का दूतावास द्वारा साझा किए गए खातों में भेजा जा रहा है या फिर आयोजकों के माध्यम से एकत्र कर ट्रांसफर किया जा रहा है। इस मुहिम में बच्चों तक की भागीदारी दिखी है, जो अपनी जेब खर्च और बचत दान कर रहे हैं।
धार्मिक जुड़ाव और मानवीय भावना
आयोजकों के अनुसार, यह अभियान सिर्फ मानवीय चिंता नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव से भी प्रेरित है। खासकर शिया मुस्लिम समुदाय का ईरान के साथ गहरा धार्मिक संबंध रहा है, जिसने इस पहल को और मजबूती दी है।
ईरान से ऐतिहासिक रिश्ता
कश्मीर और ईरान के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। फारसी भाषा, कला, स्थापत्य और इस्लामी विद्वता ने कश्मीर की पहचान को गहराई से प्रभावित किया है। इसी कारण कश्मीर को कभी “ईरान-ए-सगीर” (छोटा ईरान) भी कहा जाता था।
ईरान ने जताया आभार
भारत में ईरान का दूतावास ने इस पहल के लिए कश्मीर के लोगों का आभार जताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में कहा गया कि यह सहयोग और एकजुटता का भाव दिल को छूने वाला है और इसे कभी भुलाया नहीं जाएगा।
With hearts full of gratitude, we sincerely thank the kind people of Kashmir for standing with the people of Iran through their humanitarian support and heartfelt solidarity; this kindness will never be forgotten.
Thank you, India. https://t.co/6rEyYEfjHu— Iran in India (@Iran_in_India) March 22, 2026
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में गहनों, नकदी और बर्तनों का बड़ा संग्रह दिखाई दे रहा है, जो इस अभियान के व्यापक स्तर को दर्शाता है।
We will never forget your kindness and humanity.
Thank you, India. https://t.co/hiYnIEfN3D— Iran in India (@Iran_in_India) March 22, 2026
सभी का प्रतिनिधित्व नहीं
हालांकि इस पहल को अक्सर “कश्मीरियों” से जोड़ा जा रहा है, लेकिन वास्तव में यह घाटी के मुस्लिम समाज के कुछ वर्गों—विशेषकर शिया समुदाय—तक सीमित है और यह सभी धर्मों या समुदायों का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

