प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 मार्च 2026 को पश्चिमी असम में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें भूटान (Bhutan) को कोकराझार (Kokrajhar) से जोड़ने वाला पहला रेल नेटवर्क विशेष रूप से उल्लेखनीय है। 3,456 करोड़ रुपये की इस परियोजना से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। लगभग 69 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन बालाजान, गारूभासा, रूनीखाता, शांतिपुर और दादगिरी होते हुए भूटान के गेलेफू (Gelephu) तक पहुंचेगी।
इसके अतिरिक्त, बनारहाट-समत्से के बीच प्रस्तावित 20 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन भूटानी नागरिकों को भारतीय रेल नेटवर्क से सीधे जोड़ने में सहायक होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन रेल परियोजनाओं और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण से कोकराझार-चिरांग क्षेत्र को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही, केंद्र सरकार ने भूटान को उसकी 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
इस बीच, भूटान के चिरांग जिले की सीमा के पास गेलेफू में प्रस्तावित ‘माइंडफुलनेस सिटी’ तेजी से आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने की थी, जिन्होंने 17 दिसंबर 2023 को इसे विशेष प्रशासनिक क्षेत्र घोषित करने की घोषणा की थी। ‘Gelephu Mindfulness City’ (GMC) को पूर्ण प्रशासनिक स्वायत्तता प्राप्त होगी, जिसमें कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के स्वतंत्र ढांचे शामिल होंगे।
यह शहर ‘सकल राष्ट्रीय खुशहाली’ (Gross National Happiness) के सिद्धांत पर आधारित होगा, जो भूटान की विकास नीति का मूल आधार है। GMC में प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी। यहां एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, उच्च शिक्षा संस्थान और उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसके 2029 तक चालू होने की संभावना है।

करीब 2,600 वर्ग किलोमीटर में फैले इस शहर का लक्ष्य अपनी 60 प्रतिशत भूमि को वन क्षेत्र के रूप में संरक्षित रखना है और पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर रहना है। प्रारंभिक चरण में इसकी आबादी लगभग एक लाख होगी, जिसे 2065 तक बढ़ाकर 10 लाख तक ले जाने की योजना है।
भूटान के राजा ने इस परियोजना को युवाओं के पलायन को रोकने और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में देखा है। इस महत्वाकांक्षी पहल में अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ‘फाउंडिंग मेंबर’ के रूप में जुड़े हैं। ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उनका अनुभव GMC के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत-भूटान संबंध भी इस परियोजना के साथ और मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। मार्च 2024 में भूटान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया था। ‘थंडर ड्रैगन की भूमि’ भूटान भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश और असम के साथ लगभग 700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने थिम्पू का दौरा कर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ किया था।
कुल मिलाकर, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भारत-भूटान के बीच द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, पर्यटन और सतत विकास का नया केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां भौतिक प्रगति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का अनूठा संतुलन देखने को मिलेगा।
(लेखक पूर्वी भारत के वरिष्ठ पत्रकार हैं)


