MI6 चीफ ब्लेज़ मेट्रेवेली की चेतावनी: शांति और युद्ध के बीच खतरनाक Grey Zone

MI6 चीफ ब्लेज़ मेट्रेवेली की चेतावनी: शांति और युद्ध के बीच खतरनाक Grey Zone
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आज की लड़ाई न शांति है, न युद्ध: साइबर हमले, झूठी खबरें और आर्थिक दबाव ही नए हथियार हैं — MI6 प्रमुख

लंदन: ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी MI6 की प्रमुख ब्लेज़ मेट्रेवेली ने दुनिया को एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आज का दौर न तो पूरी तरह शांति का है और न ही खुले युद्ध का, बल्कि यह “शांति और युद्ध के बीच का खतरनाक ग्रे ज़ोन (Grey Zone)” है, जहां लड़ाइयाँ चुपचाप लड़ी जा रही हैं।

अपने पद संभालने के बाद पहले बड़े सार्वजनिक भाषण में मेट्रेवेली ने कहा कि अब देशों को कमजोर करने के लिए गोलियों और टैंकों की जरूरत नहीं होती। साइबर हमले, झूठी खबरें, अफवाहें, डिजिटल जासूसी और गुप्त साज़िशें ही नए हथियार बन चुके हैं।

MI6 क्या है?

MI6, जिसे आधिकारिक तौर पर सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (SIS) कहा जाता है, ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी है। इसका काम विदेशों में जाकर गुप्त सूचनाएं जुटाना, खतरों का आकलन करना और सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारियां देना है।

MI6 देश के भीतर काम नहीं करती—वह जिम्मेदारी MI5 की होती है। MI6 प्रमुख को परंपरागत रूप से “C” कहा जाता है और वे सीधे ब्रिटेन के विदेश मंत्री को रिपोर्ट करते हैं।

रूस और दुश्मन देशों पर सीधी बात

मेट्रेवेली ने रूस का नाम लेते हुए कहा कि कुछ देश जानबूझकर कूटनीति की आड़ में छिपे हुए हमले कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस जैसे देश यूरोप और पश्चिमी लोकतंत्रों को कमजोर करने के लिए साइबर अटैक, दुष्प्रचार और गुप्त गतिविधियों का सहारा ले रहे हैं।

उनका कहना था कि यह रणनीति खुला युद्ध किए बिना डर और भ्रम फैलाने के लिए अपनाई जा रही है।

जासूसी की दुनिया बदल रही है

MI6 प्रमुख ने साफ कहा कि अब जासूसी सिर्फ एजेंटों और गुप्त मुलाकातों तक सीमित नहीं है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिसिस, ड्रोन और साइबर टेक्नोलॉजी आज खुफिया काम का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने बताया कि भविष्य के जासूसों को इंसानों से जानकारी जुटाने के साथ-साथ तकनीक में भी माहिर होना पड़ेगा।

अब सिर्फ बचाव नहीं, सक्रिय रणनीति

मेट्रेवेली ने संकेत दिया कि MI6 अब सिर्फ खतरों पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहेगी। ब्रिटेन को समय रहते खतरों को रोकने के लिए ज्यादा सक्रिय और आक्रामक खुफिया रणनीति अपनानी होगी। इसके लिए सहयोगी देशों, खासकर नाटो के साथ तालमेल और मजबूत किया जाएगा।

क्यों अहम है यह चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि MI6 प्रमुख का खुलकर बोलना इस बात का संकेत है कि दुनिया में छुपे युद्ध तेजी से बढ़ रहे हैं।

1909 में बनी MI6 की पहली महिला प्रमुख के तौर पर ब्लेज़ मेट्रेवेली की यह चेतावनी सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि आने वाले समय की सुरक्षा चुनौतियों का स्पष्ट संकेत भी है—जहां लड़ाइयाँ अब मैदान में नहीं, बल्कि नेटवर्क, स्क्रीन और दिमागों में लड़ी जाएंगी।

‘Grey Zone’ खतरा क्या है? — MI6 प्रमुख की चेतावनी का मतलब

MI6 प्रमुख ब्लेज़ मेट्रेवेली ने जिस “Grey Zone” (ग्रे ज़ोन) खतरे की बात की है, उसका मतलब है—
  ऐसी लड़ाई जो न पूरी तरह शांति है, न खुला युद्ध।

यह एक छुपा हुआ, धीमा और लगातार चलने वाला संघर्ष होता है, जिसमें दुश्मन देश सीधे हमला नहीं करता, बल्कि पीछे से वार करता है।


Grey Zone युद्ध कैसे लड़ा जाता है?

🔹 1. साइबर हमले

बिना एक भी गोली चलाए:

  • बिजली ग्रिड ठप करना

  • बैंकिंग सिस्टम हैक करना

  • सरकारी वेबसाइट्स और डाटा चुराना

इन हमलों का मकसद देश को अंदर से कमजोर करना होता है।


🔹 2. झूठी खबरें और दुष्प्रचार

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके:

  • अफवाहें फैलाना

  • चुनावों को प्रभावित करना

  • समाज में डर, गुस्सा और नफरत पैदा करना

लोगों को यह तक पता नहीं चलता कि वे किसी विदेशी एजेंडे का हिस्सा बन चुके हैं।


🔹 3. तोड़फोड़ और गुप्त साज़िश

  • रेल, बंदरगाह या फैक्ट्री में रहस्यमय आग

  • महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को नुकसान

  • ऊर्जा और संचार ढांचे पर छिपे हमले

इनमें हमलावर सामने नहीं आता, इसलिए जवाब देना मुश्किल हो जाता है।


🔹 4. कूटनीति की आड़ में हमला

Grey Zone की खास बात यह है कि
दुश्मन देश बातचीत और समझौतों का दिखावा करता है,
लेकिन पीछे से नुकसान पहुंचाता रहता है।

इसीलिए मेट्रेवेली ने कहा—

“यह लड़ाई कानून और युद्ध की रेखा के बीच खेली जा रही है।”


🔹 5. प्रॉक्सी और नकली संगठन

  • फर्जी NGOs
  • थिंक टैंक
  • ऑनलाइन ग्रुप्स

इनके ज़रिए किसी देश के अंदर विरोध, अस्थिरता और भ्रम पैदा किया जाता है—बिना यह बताए कि इसके पीछे कौन है।


Grey Zone सबसे खतरनाक क्यों है?

  • क्योंकि इसमें दुश्मन दिखता नहीं
  • क्योंकि इसका सबूत जुटाना मुश्किल होता है
  • क्योंकि यह सीधे युद्ध की सीमा पार नहीं करता, इसलिए जवाबी हमला करना कठिन होता है
  • क्योंकि यह लोगों के दिमाग और भरोसे पर हमला करता है

MI6 प्रमुख के मुताबिक, यही वजह है कि आज की सबसे बड़ी लड़ाइयाँ सीमाओं पर नहीं, बल्कि सिस्टम, नेटवर्क और समाज के अंदर लड़ी जा रही हैं।


MI6 क्यों चिंतित है?

ब्लेज़ मेट्रेवेली का साफ संदेश है:

  • आने वाले समय में युद्ध की घोषणा नहीं होगी
  • लेकिन हमला रोज़ होगा
  • और अगर समय रहते पहचाना नहीं गया, तो लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकते हैं

Grey Zone युद्ध का मतलब है—

“बिना युद्ध घोषित किए, देश को हर रोज़ कमजोर करना।”

MI6 की चेतावनी यही है कि अगर दुनिया अब भी युद्ध को सिर्फ बंदूक और मिसाइल से मापेगी, तो वह असली खतरे को समझ ही नहीं पाएगी।

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