The Mother Of All Deals
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‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) से बदलेगा वैश्विक व्यापार
JNS: वर्षों तक चली बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने के बाद इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिक गई हैं।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “भारत और यूरोप के रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़” बताया और कहा कि यह समझौता टूटते वैश्विक व्यापार ढांचे में मुक्त, निष्पक्ष और नियम-आधारित व्यापार का मजबूत संदेश देता है।

वैश्विक व्यापार का नया अध्याय
यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाएं, निवेश, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा, पर्यावरण, श्रम मानक और तकनीकी सहयोग जैसे अहम अध्याय भी शामिल हैं। भारत और EU मिलकर लगभग दो अरब उपभोक्ताओं का साझा बाजार बनाते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में से एक बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह करार “भारतीय उद्योग, किसानों, युवाओं और नवाचार के लिए नए अवसर खोलेगा” और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और मजबूत बनाएगा।
The India–EU Free Trade Agreement marks a decisive shift in India’s global economic engagement. From manufacturing and agriculture to MSMEs, services, and high-tech sectors, this landmark pact unlocks unprecedented access to European markets and strengthens India’s position in… pic.twitter.com/MKsuapI8nF
— MyGovIndia (@mygovindia) January 27, 2026
समझौते के प्रमुख बिंदु
1. बड़े पैमाने पर टैरिफ में कटौती
भारत, यूरोपीय उत्पादों—जैसे मशीनरी, मेडिकल उपकरण, रसायन, वाइन, लग्जरी सामान और ऑटोमोबाइल—पर चरणबद्ध तरीके से आयात शुल्क घटाएगा। बदले में EU, भारतीय निर्यात पर लगने वाले अधिकतर शुल्क हटाएगा।
2. भारतीय श्रम-प्रधान उद्योगों को बढ़त
टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग सामान जैसे क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
3. ऑटोमोबाइल क्षेत्र में संतुलित खुलापन
चुनिंदा यूरोपीय कारों पर शुल्क में चरणबद्ध कटौती होगी। यह कटौती मुख्य रूप से प्रीमियम वाहनों तक सीमित रहेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों को शुरुआती वर्षों में संरक्षण मिलेगा।
4. सेवाएं और आईटी सेक्टर को नई राह
भारतीय आईटी, सॉफ्टवेयर, कंसल्टिंग और वित्तीय सेवाओं को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा। वहीं EU कंपनियों को भारत के सेवा क्षेत्र में आसान प्रवेश मिलेगा।
5. डिजिटल व्यापार और डेटा नियम
ई-कॉमर्स, साइबर सुरक्षा और सीमा-पार डेटा प्रवाह के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं, जिससे डिजिटल कारोबार सुरक्षित और पारदर्शी बनेगा।
6. निवेश और बौद्धिक संपदा संरक्षण
निवेशकों के लिए मजबूत सुरक्षा प्रावधान होंगे, साथ ही दवाओं और तकनीक तक किफायती पहुंच बनाए रखने के लिए संतुलन रखा गया है।
7. जलवायु और सतत विकास
EU, हरित तकनीक और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत को तकनीकी व वित्तीय सहयोग देगा।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
इस समझौते से आने वाले दशक में भारत–EU व्यापार में तेज़ वृद्धि की उम्मीद है। यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक साझेदारी भी है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विविध बनाएगी।
आगे की प्रक्रिया
समझौते को अब कानूनी जांच और संसदों की मंजूरी से गुजरना होगा। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
“मदर ऑफ ऑल डील्स” केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच भविष्य की साझेदारी का रोडमैप है—जो रोजगार, निवेश और वैश्विक नेतृत्व की दिशा तय करेगा।

