“लाले लाले साड़ी पर धानी किनारी, चोली केहन छींटदार सजनी…”
अरुण पाठक
बोकारो : अन्तरराष्ट्रीय मैथिली परिषद की इकाई मिथिला कला मंच (Mithila Kala Manch) ने मंगलवार की शाम गूगल मीट के माध्यम से अपनी पहली ऑनलाइन (Online) संगीतमय बैठक का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध और प्रभावशाली रहा।
इस संगीतमय संध्या में भारत और नेपाल के विभिन्न स्थानों से जुड़े मैथिली कवियों और कलाकारों ने गीत एवं कविताओं के माध्यम से मैथिली भाषा और संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन आसनसोल की पूनम झा ने किया। उन्होंने विद्यापति की प्रसिद्ध रचना “जय-जय भैरवि” से कार्यक्रम का शुभारंभ किया और भगवती वंदना भी प्रस्तुत की। प्रतिभा द्वारा प्रस्तुत “उच्चैठ में बैसल जननी, बैसल द्वार हे…” को भी खूब सराहा गया।
मुख्य प्रस्तुतियों में हिमाद्रि मिश्रा ने “मैथिली रानी बनि राजकार्य, सुषुप्ति जनक बीच में उठबय…” प्रस्तुत किया, जबकि वाराणसी के अशोक मिश्रा ने भावपूर्ण नचारी “दीन दुखी हम भेलहुँ हे…” गाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। दिल्ली की प्रतिभा और नेपाल के भैरहवा से सोनू ठाकुर ने “कतेक नींद में छी, जागु…” प्रस्तुत किया।
जमशेदपुर के नीलाम्बर चौधरी ने स्वर्गीय लल्लन प्रसाद ठाकुर (समौल गांव) की रचना “मधुर-मधुर भई बांसुरिया…” का मधुर गायन किया। वहीं बोकारो के अरुण पाठक ने लोकगीत “लाले लाले साड़ी पर धानी किनारी, चोली केहन छींटदार सजनी…” की सुमधुर प्रस्तुति से सभी की वाहवाही लूटी।
अन्य प्रतिभागियों में धनबाद की निशा झा, पटना के अक्षय, देवघर की मीनाक्षी, मधुबनी की चंदना दत्ता तथा बंगलोर से बेनी झा शामिल रहीं, जिन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया। इस अवसर पर बोकारो की नीलम झा और रमण झा भी उपस्थित रहे।
दरभंगा के मौबेहट से संकय ठाकुर ने आशा व्यक्त की कि मिथिला कला मंच एक सशक्त सांस्कृतिक मंच के रूप में विकसित होगा। इस अवसर पर संस्थापक डॉ. धनाकर ठाकुर ने घोषणा की कि ऐसी ऑनलाइन बैठक प्रत्येक माह की 24 तारीख को नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि 37वां अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन रायपुर में 18–19 अप्रैल 2026 को आयोजित होगा।
कार्यक्रम का समापन मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

