50+ कॉल, 5 मिलियन डॉलर की लॉबिंग: Operation Sindoor रोकने को पाकिस्तान की अमेरिका (US) से गुहार

50+ कॉल, 5 मिलियन डॉलर की लॉबिंग: Operation Sindoor रोकने को पाकिस्तान की अमेरिका (US) से गुहार
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका (US) के Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत सार्वजनिक हुए दस्तावेज़ों ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तान (Pakistan) की घबराई हुई कूटनीति को बेनकाब कर दिया है। इन दस्तावेज़ों के अनुसार, अप्रैल में चले इस सैन्य अभियान के बीच पाकिस्तान ने अमेरिका से बार-बार मदद की गुहार लगाई और इसके बदले निवेश, व्यापारिक रियायतें और यहां तक कि अहम खनिजों तक विशेष पहुंच का प्रस्ताव रखा।

दस्तावेज़ बताते हैं कि पाकिस्तान के राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने अमेरिका में अपने समकक्षों से 50 से अधिक बार ईमेल और फोन कॉल के जरिए संपर्क किया। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों, बिचौलियों और यहां तक कि मीडिया से भी आमने-सामने मुलाकात की कोशिशें की गईं।

अमेरिका से भारत से बात कराने की अपील

FARA फाइलों के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत से ऑपरेशन रोकने के लिए संवाद शुरू कराने की अपील की और खुलकर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का स्वागत किया। यही नहीं, पाकिस्तान ने अमेरिका से कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले की “स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच” में भूमिका निभाने को भी कहा।

इन दस्तावेज़ों में यह भी दर्ज है कि पाकिस्तान भारत के साथ आतंकवाद, सिंधु जल संधि और अन्य विवादित मुद्दों पर बातचीत चाहता है। पाकिस्तान का मानना था कि किसी तीसरे पक्ष की मौजूदगी से “सत्यापन योग्य समझौते” संभव हो सकते हैं। इस संदर्भ में डोनाल्ड ट्रंप पहले भी दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति को टलवाया था।

अमेरिका को लुभाने की कोशिश

सिर्फ अपीलों तक ही सीमित न रहते हुए, पाकिस्तान ने संयुक्त राज्य अमेरिका को कई तरह के प्रलोभन भी दिए। इनमें अमेरिका से ऊर्जा और कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ाना, व्यापार बाधाएं कम करना और द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करने के कदम शामिल थे।

पाकिस्तान ने खुद को एक युवा और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि वह अमेरिका के लिए बड़े निवेश के अवसर उपलब्ध करा सकता है। इसके साथ ही, अहम खनिजों और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का संकेत भी दिया गया।

आतंकवाद पर सहयोग का दावा

दस्तावेज़ों में पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता भी गिनाई। उसने दावा किया कि उसने 13 अमेरिकी सैनिकों की जान लेने वाले ISIS के एबी गेट हमलावर को गिरफ्तार कर अमेरिका को सौंपकर सहयोग दिखाया है। साथ ही, पाकिस्तानी तालिबान से खतरे का हवाला देते हुए कहा गया कि यह समूह अमेरिका के लिए भी संभावित खतरा है।

FARA दस्तावेज़ साफ करते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका के दरवाजे पर बार-बार दस्तक दी—कूटनीति, व्यापार और सुरक्षा सहयोग के हर पत्ते को खेलते हुए—ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके और अभियान को रोका जा सके।

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