नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में नए बने ‘सेवा तीर्थ’ परिसर (Sewa Teerth Complax) का उद्घाटन किया और इसके साथ ही कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 को भी राष्ट्र को समर्पित किया। यह कदम सरकार के प्रशासनिक ढांचे को अधिक आधुनिक, सुव्यवस्थित और नागरिकों के करीब लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल नए भवनों का उद्घाटन नहीं है, बल्कि शासन की सोच में बदलाव का प्रतीक है — सत्ता के पुराने ढांचे से सेवा की भावना की ओर बढ़ने का संकेत। काफी समय से केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रालय और दफ्तर केंद्रीय विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग और पुराने भवनों में काम कर रहे थे। इससे समन्वय में परेशानी, समय की बर्बादी और रखरखाव का अतिरिक्त बोझ जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नए परिसरों के जरिए इन संस्थानों को एक जगह लाकर कामकाज को अधिक आसान और तेज बनाने की कोशिश की गई है।
One Nation. One Coordinated Governance Framework.
Did You Know?
Over 50 government offices in Delhi functioned from scattered buildings, costing more than ₹1,500 crore annually in rent alone. That’s public money spent on fragmentation instead of efficiency.
With the… pic.twitter.com/O2KDOPbu8x— Abhijit Kalita (@Akalitabjp) February 13, 2026
अब ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित होंगे। पहले ये संस्थान अलग-अलग स्थानों पर थे, लेकिन एक ही परिसर में आने से फैसले लेने और आपसी तालमेल में तेजी आने की उम्मीद है।
वहीं कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सूचना एवं प्रसारण जैसे अहम मंत्रालयों को जगह दी गई है। इससे मंत्रालयों के बीच संवाद और समन्वय बेहतर होने की संभावना जताई जा रही है।
नए परिसरों में डिजिटल सुविधाओं से लैस कार्यालय, नागरिकों के लिए व्यवस्थित संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत व्यवस्था बनाई गई है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं।
देशवासियों की सेवा के अटूट संकल्प और ‘नागरिक देवो भव’ की पावन भावना को साथ लेकर, आज ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करने का सौभाग्य मिला।
‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के लिए हमारी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।
मेरी कामना है कि यह आने वाली पीढ़ियों को… pic.twitter.com/YWYUuSHtsD
— Narendra Modi (@narendramodi) February 13, 2026
अधिकारियों का मानना है कि कार्यालयों को एक जगह लाने से खर्च में कमी आएगी, अधिकारियों की आवाजाही कम होगी और कामकाज की गति बढ़ेगी। साथ ही सुरक्षा और पहुंच नियंत्रण की आधुनिक व्यवस्थाएं परिसर को सुरक्षित और सुचारु बनाती हैं।
‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवनों का उद्घाटन राजधानी में प्रशासनिक व्यवस्था के एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है — जहां तकनीक, स्थिरता और बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी गई है, ताकि शासन व्यवस्था ज्यादा प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बन सके।

