सिलीगुड़ी/कोलकाता: भारत की राष्ट्रपति (President) द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल (WB) के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न होने पर सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई, जिसके बाद राज्य और केंद्र के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई। राष्ट्रपति सिलीगुड़ी के पास फांसीदेवा क्षेत्र में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर आते हैं तो मुख्यमंत्री को उपस्थित रहना चाहिए, लेकिन इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री मौजूद नहीं थे।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने देखा कि संथाल समुदाय के कई लोग कार्यक्रम स्थल के बाहर खड़े थे और अंदर प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। उनके अनुसार सम्मेलन के लिए चुना गया स्थल इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए पर्याप्त नहीं था।
उन्होंने कहा,
“मैंने देखा कि हमारे कई संथाल भाई-बहन बाहर खड़े हैं। मुझे लगा कि शायद किसी ने उन्हें अंदर आने से रोका है। रास्ते में मैं सोच रही थी कि क्या यह वास्तव में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है।”
The events in West Bengal today point to a complete collapse of the constitutional framework under the Mamata Banerjee government.
In a rare and unprecedented development, the Hon’ble President of India, Smt Droupadi Murmu, openly expressed displeasure over the lack of… pic.twitter.com/ZMiRwZkVbJ
— Amit Malviya (@amitmalviya) March 7, 2026
केंद्र ने मांगा स्पष्टीकरण
इस बीच केंद्र सरकार ने भी पश्चिम बंगाल प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल से जुड़े कथित उल्लंघनों पर जवाब मांगा है।
रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र ने राष्ट्रपति के आगमन के समय मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अनुपस्थिति को गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन बताया है।
इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि राष्ट्रपति के लिए तैयार किए गए शौचालय में पानी की व्यवस्था क्यों नहीं थी और उनके मार्ग पर कुछ स्थानों पर कचरा क्यों पड़ा था।
स्थल बदलने से उठा विवाद
यह सम्मेलन पहले सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में आयोजित होने वाला था, जहां संथाल समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। आयोजकों का कहना था कि वहां अधिक लोगों के आने की संभावना थी और स्थान भी उपयुक्त था।
लेकिन बाद में प्रशासन ने भीड़ और यातायात की समस्या का हवाला देते हुए कार्यक्रम का स्थल बदलकर गोसाईपुर (फांसीदेवा) कर दिया। इस बदलाव को लेकर राष्ट्रपति ने भी सवाल उठाए और कहा कि संभव है इसी कारण बड़ी संख्या में आदिवासी लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति बिधाननगर भी गईं और वहां स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह स्थान अधिक खुला और उपयुक्त दिखाई देता है और यहां लाखों लोग आसानी से एकत्र हो सकते थे।
“शायद ममता दीदी मुझसे नाराज़ हैं”
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उन्हें अपनी छोटी बहन की तरह मानती हैं, लेकिन समझ नहीं पा रहीं कि वे कार्यक्रम में क्यों नहीं आईं।
उन्होंने कहा,
“ममता दीदी मेरी छोटी बहन जैसी हैं। शायद वे मुझसे नाराज़ हैं।”
मुर्मू ने यह भी कहा कि आमतौर पर राष्ट्रपति के किसी राज्य में आने पर मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के मंत्री कार्यक्रमों में मौजूद रहते हैं।
मोदी ने कहा—‘शर्मनाक और अभूतपूर्व’
राष्ट्रपति की टिप्पणी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम बंगाल सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे “शर्मनाक और अभूतपूर्व” बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति के प्रति इस तरह का व्यवहार पूरे देश को दुखी करने वाला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है, इसलिए उसका सम्मान करना हर सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि संथाल संस्कृति के उत्सव के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम को राज्य प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
This is shameful and unprecedented. Everyone who believes in democracy and the empowerment of tribal communities is disheartened.
The pain and anguish expressed by Rashtrapati Ji, who herself hails from a tribal community, has caused immense sadness in the minds of the people… https://t.co/XGzwMCMFrT
— Narendra Modi (@narendramodi) March 7, 2026
ममता बनर्जी का पलटवार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उनका कहना था कि राष्ट्रपति को यह बताया गया कि राज्य के प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे, जबकि यह जानकारी सही नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके व्यस्त कार्यक्रम के कारण वह इस आयोजन में शामिल नहीं हो सकीं।
ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के कारण उनका कार्यक्रम पहले से तय था और हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं होता।
आदिवासी सम्मेलन से राजनीतिक बहस तक
संथाल समुदाय पूर्वी भारत—खासकर पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा—की बड़ी आदिवासी आबादी में शामिल है। ऐसे सम्मेलन आमतौर पर उनकी भाषा, संस्कृति और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किए जाते हैं।
लेकिन इस बार यह सांस्कृतिक कार्यक्रम राजनीतिक विवाद में बदल गया है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण संथाल समुदाय के इस बड़े सांस्कृतिक आयोजन से ध्यान हटकर राजनीतिक बहस पर केंद्रित हो गया है।

