नई दिल्ली: पारंपरिक युद्ध क्षमता में बड़ी छलांग लगाते हुए भारत 155mm तोपों के लिए रामजेट-पावर्ड (Ramjet-Powered) आर्टिलरी शेल (Artillery Shells) को ऑपरेशनल रूप से तैनात करने वाला दुनिया का पहला देश बनने जा रहा है। इस स्वदेशी गोले से बिना मौजूदा तोप प्लेटफॉर्म बदले, आर्टिलरी की मारक क्षमता और रेंज में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
यह अत्याधुनिक गोला Defence Research and Development Organisation (DRDO) के नेतृत्व में भारतीय शैक्षणिक संस्थानों और घरेलू रक्षा उद्योग के सहयोग से विकसित किया गया है। आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इसके भारतीय सेना में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है रामजेट-पावर्ड आर्टिलरी शेल?
पारंपरिक या रॉकेट-असिस्टेड गोलों से अलग, रामजेट शेल एयर-ब्रीदिंग प्रोपल्शन पर काम करता है। तोप से निकलने के बाद इसका रामजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर उड़ान के दौरान थ्रस्ट पैदा करता है। नतीजा—गोला ज्यादा देर तक तेज़ रफ्तार बनाए रखता है और रेंज कई गुना बढ़ जाती है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह गोला 155mm तोपों की प्रभावी रेंज 30–50 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है—यानी उन दूरियों तक सटीक वार, जहाँ पहले मिसाइल या गाइडेड रॉकेट की जरूरत पड़ती थी।
🚨𝐁𝐑𝐄𝐀𝐊𝐈𝐍𝐆 : The #IndianArmy is set to become the world’s first force to field ramjet-powered 155mm artillery shells, extending range by 30–50% without any loss of lethality. 🇮🇳🚀💥
The system can be retrofitted to existing ammunition and is under trials with IIT Madras. pic.twitter.com/3xBXrjyznY
— Tanmay Kulkarni 🇮🇳 (@Tanmaycoolkarni) January 2, 2026
कब और कहाँ हुए परीक्षण?
तैनाती से पहले इस गोले का व्यापक परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। 2023–24 के दौरान कई चरणों में ग्राउंड और फ्लाइट ट्रायल हुए, जिनमें प्रोपल्शन की स्थिरता, एयर-इनटेक दक्षता, अत्यधिक त्वरण में संरचनात्मक मजबूती और मज़ल-एग्ज़िट के बाद सतत थ्रस्ट जैसे अहम मानकों की जांच की गई।
इसके बाद 155mm/52-कैलिबर तोपों के साथ संगतता, एयरोडायनामिक स्थिरता और ऑपरेशनल सेफ्टी का मूल्यांकन हुआ। सफल परीक्षणों के बाद आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड ने हरी झंडी दी।
मौजूदा तोप प्रणालियों के साथ पूरी तरह संगत
इस रामजेट शेल की बड़ी खूबी यह है कि यह भारतीय सेना की मौजूदा तोपों—ATAGS, K9 Vajra-T और M777—के साथ बिना किसी बड़े बदलाव के काम करता है। इससे लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग या प्लेटफॉर्म में भारी संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रणनीतिक और ऑपरेशनल असर
विशेषज्ञ इसे गेम-चेंजर मानते हैं। इससे भारतीय आर्टिलरी दुश्मन की काउंटर-बैटरी रेंज से बाहर रहते हुए गहरे लक्ष्यों पर प्रहार कर सकेगी और लंबी दूरी के लिए महंगे गाइडेड हथियारों पर निर्भरता घटेगी।
यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती देती है—उन्नत गोला-बारूद में घरेलू क्षमता बढ़ेगी और विदेशी निर्भरता कम होगी।
वैश्विक दौड़ में भारत सबसे आगे
अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश रामजेट-असिस्टेड आर्टिलरी पर प्रयोग कर चुके हैं, लेकिन सार्वजनिक जानकारी के मुताबिक 155mm श्रेणी में प्रयोग से आगे बढ़कर तैनाती-तैयार क्षमता हासिल करने वाला भारत पहला देश है।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार उत्पादन और इंडक्शन टाइमलाइन पर आगे घोषणाएँ होंगी, लेकिन सफल परीक्षण भारत की आर्टिलरी आधुनिकीकरण यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर हैं।
रैमजेट-चालित 155 मिमी तोप के गोले
रैमजेट-चालित 155 मिमी आर्टिलरी शेल ऐसे आधुनिक तोप के गोले होते हैं जिनमें रैमजेट इंजन लगा होता है। यह इंजन गोले के दागे जाने के बाद हवा से ऑक्सीजन लेकर उसे उड़ान के दौरान अतिरिक्त गति और शक्ति देता है।
सरल शब्दों में
155 मिमी → तोप के गोले का आकार (कैलिबर)
आर्टिलरी शेल → भारी तोप से दागा जाने वाला गोला
रैमजेट-पावर्ड → हवा से चलने वाला इंजन, जो उड़ान के दौरान गोले को और तेज़ करता है
यह कैसे काम करता है?
तोप से निकलते ही गोला बहुत तेज़ गति में होता है। उसी गति का इस्तेमाल करते हुए रैमजेट इंजन सक्रिय हो जाता है और हवा को भीतर खींचकर गोले को अधिक दूर तक उड़ने में मदद करता है।
इसका फायदा क्या है?
सामान्य गोले की तुलना में काफी ज़्यादा दूरी तक मार
बिना नई तोप खरीदे पुरानी 155 मिमी तोपों से ही उपयोग संभव
दुश्मन पर सुरक्षित दूरी से सटीक हमला
परिभाषा:
रैमजेट-चालित 155 मिमी आर्टिलरी शेल ऐसे उन्नत तोप के गोले हैं, जो हवा से चलने वाले इंजन की मदद से सामान्य गोलों की तुलना में कहीं अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम होते हैं।

