अमन कुमार झा की मैथिली नाटक पुस्तक ‘टीक रखनिहार बाबा’ का लोकार्पण
अरुण पाठक
बोकारो : साहित्यिक संस्था Sahityalok (साहित्यलोक ) के 34वें स्थापना दिवस (Foundation Day) के अवसर पर रविवार को मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल (Mithila Academy Public School) के विद्यापति सभागार में भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मिथिला सांस्कृतिक परिषद एवं साहित्यलोक के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला शिक्षा पदाधिकारी बोकारो जगरनाथ लोहरा, विशिष्ट अतिथि जिला शिक्षा अधीक्षक डॉ. अतुल कुमार चौबे, मिथिला सांस्कृतिक परिषद के महासचिव नीरज चौधरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार, सचिव दिलीप कुमार झा, मिथिला महिला समिति की अध्यक्ष पूनम मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा, विजय शंकर मल्लिक तथा साहित्यलोक के संयोजक अमन कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर एवं महाकवि विद्यापति की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन कर किया।
गायक उमेश कुमार झा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, वहीं उदीयमान गायिका आंचल पाठक ने महाकवि विद्यापति की रचना ‘जय जय भैरवि असुर भयाउनि…’ की सुमधुर प्रस्तुति दी। तबले पर हर्षित झा ने संगति की।
इस अवसर पर अमन कुमार झा द्वारा लिखित मैथिली नाटक पुस्तक ‘टीक रखनिहार बाबा’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक पर कवयित्री शैलजा झा ने समीक्षात्मक आलेख प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. अतुल कुमार चौबे ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह नाटक विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत और बुजुर्गों की भूमिका को सशक्त रूप में प्रस्तुत करता है। मुख्य अतिथि जगरनाथ लोहरा ने साहित्यलोक की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था साहित्य संवर्धन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
प्रथम सत्र के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मिथिला एकेडमी के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने कहा कि साहित्यलोक बोकारो के साहित्यिक विकास का सशक्त मंच है, जहां सभी भाषाओं के रचनाकार रचनापाठ कर सकते हैं। प्रथम सत्र का संचालन उमेश कुमार झा ने किया।
कवि सम्मेलन में काव्य रसधारा
दूसरे सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार सुखनंदन सिंह ‘सदय’ की अध्यक्षता एवं सुनील मोहन ठाकुर के संचालन में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ।
काव्यपाठ की शुरुआत अरुण पाठक ने सरस्वती वंदना “हे मां सरस्वती बुद्धि विद्या दायिनी…” से की।
इसके पश्चात् करुणा कलिका, नीलम झा, भुटकुन झा, राजीव कंठ, कल्पना झा, सुनील मोहन ठाकुर, रणधीर चंद्र गोस्वामी, अमन कुमार झा, आशुतोष कुमार, विजय शंकर मल्लिक सुधापति, बुद्धिनाथ झा एवं सुखनंदन सिंह ‘सदय’ ने अपनी-अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
साहित्यलोक के संयोजक अमन कुमार झा ने संस्था के संस्थापक शिक्षाविद तुलानंद मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा, गिरिजानंद झा ‘अर्धनारीश्वर’, कुमार मनीष अरविंद, भुटकुन झा, उदय कुमार झा, महाकवि स्वर्गीय दयाकांत झा, विनय कुमार मिश्र सहित अन्य योगदानकर्ताओं को स्मरण किया।
मिथिला सांस्कृतिक परिषद के सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक ने कहा कि साहित्यलोक की मासिक गोष्ठियां काफी चर्चित रही हैं और यहां भाषा का कोई बंधन नहीं है।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ रंगकर्मी शंभु झा ने किया।
इस अवसर पर विजय कुमार झा, के. सी. झा, ए. के. मिश्रा, अविनाश अवि, डॉ. यू. सी. झा, विनय दरिहरे, सुदीप कुमार ठाकुर, अमरनाथ झा, ममता झा, शैलेन्द्र मिश्र, ऋषिकेश चौधरी, अशोक झा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

