खबरें होंगी, चेहरे नहीं: अफगान मीडिया में विज़ुअल रिपोर्टिंग बंद
नई दिल्ली: अफगानिस्तान में Taliban ने मीडिया पर शिकंजा और कस दिया है। अगस्त 2024 में लागू किए गए अपने तथाकथित “नैतिकता कानून” के तहत तालिबान अब मीडिया में “जीवित प्राणियों की तस्वीरें” (No Image) दिखाने पर सख्ती से रोक (ban) लगा रहा है। इस कड़ी में पश्चिमी हेरात प्रांत में मीडिया संस्थानों और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स—जिसमें यूट्यूबर्स भी शामिल हैं—को तलब कर लोगों की तस्वीरें या वीडियो प्रसारित न करने का आदेश दिया गया है, ऐसा स्थानीय अख़बार Kabul Now ने बताया।
UN warns T@liban’s rule deepens repression in Afghanistan. Women and girls face bans from education and work, minorities are marginalized, and journalists targeted, signaling a severe human rights crisis with wider regional security implications. pic.twitter.com/2CB0axkqAg
— HTN World (@htnworld) January 2, 2026
विज़ुअल रिपोर्टिंग पर ताला
नए निर्देशों के तहत पत्रकारों, एंकरों और इंटरव्यू देने वालों की फिल्मिंग या प्रसारण पर रोक लगा दी गई है। यानी खबरें होंगी, लेकिन चेहरे नहीं दिखेंगे। यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया है, जब तालिबान पहले ही शिक्षा, साहित्य और महिलाओं के अधिकारों पर कड़े प्रतिबंधों को लेकर आलोचना झेल रहा है।
कलाकारों की गिरफ्तारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने वाले वरिष्ठ थिएटर कलाकार ग़ुलाम फ़ारूक़ सरखोश और फ़िरोज़ अहमद मलाइका को हिरासत में लिया गया। इससे सांस्कृतिक जगत और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता और गहराई है।
23 प्रांतों में लागू, टीवी चैनल बंद
तालिबान के ‘नेकी के प्रचार और बुराई की रोकथाम विभाग’ और सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से जारी यह आदेश अब अफगानिस्तान के 34 में से 23 प्रांतों में लागू हो चुका है। इसके चलते कम से कम 20 टीवी चैनलों को प्रसारण बंद करना पड़ा है।
कंटेंट ही नहीं, पहनावे पर भी निर्देश
पाबंदियां सिर्फ कंटेंट तक सीमित नहीं हैं। पत्रकारों को दाढ़ी रखने और टाई न पहनने जैसे निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे पेशेवर स्वतंत्रता और निजी अभिव्यक्ति पर असर पड़ा है।
ऑडियो-ओनली न्यूज़रूम
नतीजतन, कई चैनल पूरी तरह ऑडियो-ओनली बन गए हैं। वीडियो की जगह इमारतों, सड़कों या लैंडस्केप के दृश्य दिखाए जा रहे हैं, जबकि पृष्ठभूमि में आवाज़ें सुनाई देती हैं। कई जगहों पर लोगों की पहचान स्क्रीन से गायब हो चुकी है।
किस कानून से आया यह आदेश
यह सख्ती तालिबान प्रमुख Hibatullah Akhundzada द्वारा अगस्त 2024 में हस्ताक्षरित नैतिकता कानून का हिस्सा है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि तस्वीरों पर रोक लगाकर समाज से चेहरे और पहचान मिटाई जा रही है।
प्रेस स्वतंत्रता का गिरता ग्राफ
तालिबान के 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से अफगान मीडिया की हालत तेजी से बिगड़ी है। पत्रकारों के लिए जारी दिशानिर्देशों में “इस्लाम के खिलाफ” माने जाने वाले कंटेंट, “राष्ट्रीय हस्तियों” का अपमान और निजता उल्लंघन पर रोक शामिल है।
निर्वासन में रह रहे पत्रकारों के अनुसार, 2021 से पहले सक्रिय करीब 12,000 मीडिया कर्मियों में से अब लगभग 4,500 ही काम कर पा रहे हैं। अफगानिस्तान पिछले साल World Press Freedom Index में 180 में 175वें स्थान पर रहा।
महिलाओं और ऑनलाइन क्रिएटर्स पर भी पाबंदी
मीडिया और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की आवाज़ पर भी कड़े प्रतिबंध हैं। UNAMA की 2024 की रिपोर्ट में बताया गया कि व्यंग्य या आलोचना करने पर TikTok और YouTube क्रिएटर्स की गिरफ्तारियां हुईं।
प्रचार तंत्र का विस्तार
इस बीच, Afghanistan Journalists Center का कहना है कि तालिबान टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया पर खुले और गुप्त प्रचार नेटवर्क चला रहा है, ताकि आधिकारिक नैरेटिव को आगे बढ़ाया जा सके।
तस्वीरों पर पाबंदी और आवाज़ों पर पहरा—तालिबान के नए नियम अफगान मीडिया को खामोशी की ओर धकेल रहे हैं, जिससे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर गहरी छाया पड़ गई है।

