US Tariff Cut से India की रणनीतिक जीत, China–Pakistan को करारा झटका

US Tariff Cut से India की रणनीतिक जीत, China–Pakistan को करारा झटका
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अमेरिका (US) ने टैरिफ (Tariff) घटाकर 18% किए, भारत ने चीन–पाकिस्तान पर बढ़त बनाई — वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव


by Ashis Sinha

वैश्विक व्यापार राजनीति में बड़े बदलाव के तहत अमेरिका  (US)ने भारतीय  (Indian) वस्तुओं पर लगने वाले पारस्परिक टैरिफ  (Tariff) घटाकर 18 प्रतिशत कर दिए हैं। इससे भारत को चीन और अन्य एशियाई निर्यातकों पर निर्णायक बढ़त मिली है और वह अब वॉशिंगटन के “पसंदीदा आर्थिक साझेदारों” के विशेष समूह में शामिल हो गया है।

यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सीधी फोन बातचीत के बाद लिया गया। इससे पहले कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल शुल्क लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस फैसले का समय बेहद अहम है। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ  (EU) के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता  (FTA) किया है। इन दोनों समझौतों ने भारत को चीन के बाद बन रही नई वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बना दिया है।


भारत ‘एलीट टैरिफ क्लब’ में शामिल

18% की नई दर के साथ भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन पर अमेरिका 15–19% के बीच टैरिफ लगाता है।
इसके उलट चीन अभी भी भारी दंडात्मक शुल्कों और पुराने व्यापार प्रतिबंधों के कारण कहीं ऊंचे टैरिफ झेल रहा है।

यही अंतर अब वैश्विक कंपनियों को “चाइना प्लस वन” रणनीति के तहत भारत की ओर तेज़ी से खींच रहा है।

एशिया में भारत की नई रणनीतिक स्थिति

अब भारत अमेरिका के टैरिफ ढांचे में उस श्रेणी में आ गया है जहाँ जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्ज़रलैंड और यूरोपीय संघ जैसे करीबी अमेरिकी साझेदार शामिल हैं।

देश अमेरिकी टैरिफ
भारत 18%
चीन 34–37%
पाकिस्तान 19%
वियतनाम 20%
बांग्लादेश 20%
ताइवान 20%
लाओस 40%
म्यांमार 40%

यह बदलाव क्यों ऐतिहासिक है

कम मुनाफे वाले उद्योगों जैसे:

  • टेक्सटाइल
  • रेडीमेड गारमेंट्स
  • फुटवियर

जहां मुनाफा केवल 3–5% होता है, वहां 2–3% का टैरिफ अंतर भी फैक्ट्री लगाने का फैसला बदल देता है।

अब भारत को वियतनाम और बांग्लादेश पर स्पष्ट बढ़त मिल गई है, जिससे अरबों डॉलर के ऑर्डर भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

साथ ही:

  • फार्मास्यूटिकल्स
  • सेमीकंडक्टर
  • क्रिटिकल मिनरल्स

जैसे क्षेत्रों में अमेरिका द्वारा दी गई रियायतें भारत को चीन के विकल्प से आगे बढ़ाकर वैश्विक उत्पादन केंद्र बना रही हैं।

भारत–अमेरिका व्यापार रीसेट का पैमाना

समझौते का अहम हिस्सा यह है कि भारत आने वाले वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक के सामान खरीदेगा:

  • ऊर्जा
  • तकनीक
  • रक्षा
  • कृषि

2025 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 230 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। अब लक्ष्य है कि 2030 तक यह आंकड़ा 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।

ट्रेड स्नैपशॉट

भारत का अमेरिका को निर्यात

  • हर माह $7–8 अरब
  • इंजीनियरिंग सामान: ~25%
  • दवाएं: प्रमुख योगदान

अमेरिका की स्थिति

  • भारत के साथ व्यापार घाटा: $53 अरब से अधिक

सेवाएं

  • कुल: $83.4 अरब
  • भारत: IT, BPM
  • अमेरिका: फाइनेंस, IP, एजुकेशन

कृषि

  • अमेरिका से आयात: $1.7 अरब
  • बादाम, पिस्ता, कपास, सोयाबीन तेल

कौन जीता — और क्या अब भी स्पष्ट नहीं

कौन जीता

  • भारतीय मैन्युफैक्चरर्स
  • चीन से हट रही वैश्विक कंपनियां
  • अमेरिकी निर्यातक
  • भारत की रणनीतिक स्थिति

क्या अब भी तय नहीं

  • अंतिम टैरिफ सूची
  • छूट का टाइमलाइन
  • ऊर्जा आयात पर भारत की रणनीति
  • समझौते की कानूनी बाध्यता

रणनीतिक निष्कर्ष

यह सिर्फ टैरिफ कटौती नहीं — यह वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन का बदलाव है।

चीन के भारी शुल्क और पाकिस्तान की सीमित पहुंच के बीच,
भारत अब एशिया में अमेरिका का सबसे भरोसेमंद आर्थिक साझेदार बन चुका है।

यूरोप के साथ समानांतर व्यापार एकीकरण के साथ, भारत तेजी से नई वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बन रहा है —
जो अब बीजिंग नहीं, नई दिल्ली से संचालित होगी।

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