Washington Post ने 300 से अधिक पत्रकारों को निकाला

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Washington Post Layoffs: 300 पत्रकारों में नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख भी शामिल

 

News Desk: वाशिंगटन पोस्ट  (Washington Post) ने बुधवार को व्यापक पुनर्गठन के तहत 300 से अधिक पत्रकारों (Journalist) की छंटनी कर दी — जो उसके न्यूज़रूम का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है — और इसके साथ अंतरराष्ट्रीय कवरेज में कटौती तथा कई संपादकीय इकाइयों को समाप्त कर दिया गया। हटाए गए कर्मचारियों में अख़बार के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख प्रण्शु वर्मा भी शामिल हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी विदाई की पुष्टि की।

करीब सात महीने तक नई दिल्ली ब्यूरो का नेतृत्व करने वाले वर्मा ने इस फैसले को भावुक बताते हुए कहा कि संस्थान में काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उनकी विदाई इस बात को रेखांकित करती है कि छंटनी का दायरा व्यापक रहा, जिसमें पश्चिम एशिया, चीन, तुर्किये और ईरान जैसे क्षेत्रों को कवर करने वाले संवाददाताओं सहित कई विदेशी रिपोर्टिंग पदों को कम या समाप्त कर दिया गया।

यह कदम न्यूज़रूम के व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है। इस प्रक्रिया में अख़बार ने अपने खेल कवरेज को समाप्त कर दिया और पुस्तकों से जुड़ा सेक्शन बंद कर दिया, जबकि संपादन, मेट्रो और अंतरराष्ट्रीय डेस्क का पुनर्गठन किया गया। कई विदेशी ब्यूरो भी छोटे किए गए क्योंकि संस्थान ने अपने वैश्विक रिपोर्टिंग ढांचे को सीमित करने का फैसला लिया।

कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस निर्णय को कठिन लेकिन आवश्यक “रणनीतिक बदलाव” बताया और कर्मचारियों से कहा कि संस्थान को बदलती तकनीक, पाठकों की आदतों और डिजिटल प्रतिस्पर्धा के अनुरूप ढलना होगा। कर्मचारियों को छंटनी की जानकारी आंतरिक बैठकों के बाद व्यक्तिगत सूचनाओं के माध्यम से दी गई।

वाशिंगटन पोस्ट का स्वामित्व 2013 से अरबपति जेफ़ बेज़ोस के पास है। अमेज़न और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी ब्लू ओरिजिन के मालिक बेज़ोस ने यह अख़बार लंबे समय से प्रकाशक रहे ग्राहम परिवार से लगभग 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था — जो आधुनिक अमेरिकी मीडिया के इतिहास के प्रमुख स्वामित्व परिवर्तनों में से एक माना जाता है।

यह पुनर्गठन उस समय किया गया है जब पारंपरिक मीडिया संस्थान घटती प्रसार संख्या, विज्ञापन बाज़ार की अनिश्चितता और सदस्यता चुनौतियों जैसे वित्तीय दबावों का सामना कर रहे हैं। छंटनी को लेकर पत्रकारों के बीच वैश्विक रिपोर्टिंग की गहराई पर असर की चिंता जताई गई है, हालांकि प्रबंधन ने संकेत दिया है कि संस्थान राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा जैसे प्रमुख विषयों पर संसाधन केंद्रित करेगा ताकि संचालन को स्थिर कर भविष्य की दिशा तय की जा सके।

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