India-US Interim Trade Deal: किसानों को राहत, कृषि-डेयरी सुरक्षित; चुनिंदा आयात को मंजूरी

India-US Interim Trade Deal: किसानों को राहत, कृषि-डेयरी सुरक्षित; चुनिंदा आयात को मंजूरी
75 / 100 SEO Score

by Ashis Sinha

भारत-अमेरिका  (India-US)अंतरिम  (Interim)व्यापार समझौते  (Trade Deal) में भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्रों को सुरक्षित रखते हुए चुनिंदा अमेरिकी  (US)आयात को अनुमति दी है। यह समझौता टैरिफ संतुलन और निर्यात अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली: भारत (India) ने शनिवार को घोषित अंतरिम (Interim) व्यापार (Trade) ढांचे के तहत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्रों के चारों ओर सख्त सुरक्षा घेरा बनाए रखा है, जबकि अमेरिकी उत्पादों — जैसे ट्री नट्स, पशु चारा और प्रीमियम उपभोक्ता वस्तुओं — को सीमित बाजार पहुंच देने पर सहमति जताई है। यह कदम टैरिफ तनाव कम करने और ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह व्यवस्था औद्योगिक व्यापार में सहजता लाने के साथ घरेलू किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करती है और संवेदनशील कृषि एवं डेयरी उत्पादों को रियायतों से बाहर रखा गया है।

5 Key Heightlights of India-US Interim Trade Deal

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा

ढांचे के अनुसार मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध व डेयरी उत्पाद, एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे उत्पादों पर टैरिफ में कोई छूट नहीं दी जाएगी। डेयरी क्षेत्र — जो लाखों छोटे किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है — को विशेष सुरक्षा दी गई है और दूध, पनीर, मक्खन, घी व दही जैसे उत्पादों पर शुल्क ढील नहीं होगी।

मुख्य अनाजों को भी रियायतों से अलग रखा गया है ताकि खरीद व्यवस्था और मूल्य तंत्र प्रभावित न हों। पोल्ट्री और मांस आयात, जैसे चिकन लेग्स, पर भी कटौती लागू नहीं होगी। यह रुख दर्शाता है कि सरकार रोजगार आधारित और आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है।

अमेरिकी निर्यात के लिए सीमित अवसर

मुख्य खाद्य क्षेत्रों की सुरक्षा के बावजूद भारत ने कुछ ऐसे क्षेत्रों में शुल्क घटाने पर सहमति दी है जिन्हें कम संवेदनशील या रणनीतिक रूप से उपयोगी माना गया है। पशुपालन क्षेत्र की लागत कम करने के लिए सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स और रेड सॉरघम जैसे पशु चारा इनपुट्स के आयात को आसान बनाया जाएगा।

इसके साथ ही बादाम, अखरोट, पिस्ता जैसे प्रीमियम आयात, कुछ फलों, सोयाबीन तेल तथा उच्च-स्तरीय पेय पदार्थों जैसे वाइन और स्पिरिट्स पर शुल्क में राहत की संभावना है। इससे अमेरिकी निर्यातकों को अवसर मिलेंगे और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को पूरक समर्थन मिलेगा।

टैरिफ कटौती और निर्यात संभावनाएं

यह अंतरिम समझौता अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटने के साथ जुड़ा है, जिससे विनिर्माण क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है। पहले लगाए गए दंडात्मक शुल्क हटाए जा चुके हैं और आगे और कटौती की संभावना जताई जा रही है।

इस कदम को द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में स्थिरता लाने और लंबे समय से चले आ रहे टैरिफ विवादों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

व्यापार असंतुलन को संतुलित करने की कोशिश

भारत के कृषि निर्यात अमेरिका को मुख्यतः समुद्री उत्पादों, मसालों और बासमती चावल पर आधारित रहे हैं, जबकि अमेरिका का भारत को निर्यात अपेक्षाकृत कम रहा है। नया ढांचा इस असंतुलन को कम करने के लिए अमेरिकी उत्पादों को चयनित क्षेत्रों में पहुंच देकर संतुलन बनाने का प्रयास करता है, बिना भारत की मुख्य खाद्य अर्थव्यवस्था को प्रभावित किए।

इसके अलावा भारत ने ऊर्जा, विमानन और तकनीक जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं, जो इस साझेदारी के व्यापक रणनीतिक आयाम को दर्शाते हैं।

व्यापक समझौते की ओर कदम

कुल मिलाकर यह अंतरिम ढांचा एक संतुलित समझौते के रूप में सामने आया है — जहां भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बरकरार रखते हुए आवश्यक आयात के लिए सीमित रास्ता खोला है। अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था व्यापार संबंधों को स्थिर करने और भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय समझौते का मार्ग प्रशस्त करेगी।

Ashis Sinha

About Ashis Sinha

Ashis Sinha Journalist

View all posts by Ashis Sinha →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *