EC: राज्यसभा की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव, उपसभापति हरिवंश के भविष्य पर नजर

EC: राज्यसभा की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव, उपसभापति हरिवंश के भविष्य पर नजर
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New Delhi: चुनाव आयोग (EC) ने राज्यसभा की 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 16 मार्च को कराने की घोषणा की है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का छह वर्ष का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, जिनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी शामिल हैं।

चुनाव क्यों हो रहे हैं

राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। यह संवैधानिक व्यवस्था उच्च सदन में निरंतरता बनाए रखते हुए समय-समय पर नए सदस्यों के प्रवेश का अवसर देती है।

इस बार अप्रैल में 37 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने से रिक्तियां पैदा हो रही हैं, जिन्हें राज्य विधानसभाओं के माध्यम से होने वाले चुनावों से भरा जाएगा। ये नियमित द्विवार्षिक चुनाव हैं (जिन्हें अक्सर उपचुनाव कहा जाता है), न कि इस्तीफे या निधन से पैदा हुई मध्यावधि रिक्तियां।

चूंकि राज्यसभा सदस्य विधायकों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से चुने जाते हैं, इसलिए परिणाम संबंधित राज्यों की विधानसभाओं में दलों की संख्या-बल पर निर्भर करेगा।

राज्यवार रिक्तियां

अप्रैल में 10 राज्यों में सीटें खाली होंगी। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 7 सीटें, तमिलनाडु में 6, पश्चिम बंगाल और बिहार में 5-5, ओडिशा में 4, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 2-2, तेलंगाना में 2 तथा हिमाचल प्रदेश में 1 सीट पर चुनाव होगा।

मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और मतगणना उसी शाम की जाएगी।

उपसभापति पद पर असर

सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में जद(यू) नेता हरिवंश भी शामिल हैं, जो 2018 से राज्यसभा के उपसभापति हैं। इस संवैधानिक पद पर उनकी निरंतरता उनके पुनर्निर्वाचन और चुनाव बाद के राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगी।

सदन की कुल संख्या

राज्यसभा (परिषद्-ए-राज्य) की स्वीकृत सदस्य संख्या 245 है—जिसमें 233 सदस्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि 12 सदस्यों को साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा में विशेष योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है।

चुनाव कार्यक्रम

चुनाव प्रक्रिया 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है, 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।

कई राज्य विधानसभाओं में संख्या बल बेहद करीबी होने के कारण 16 मार्च का यह मुकाबला उच्च सदन के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

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