होली (Holi) पावनि अछि मनभावन एकरा सभ मिलि संग मनाउ…
by Arun Pathak
बोकारो : बोकारो इस्पात संयंत्र (Bokaro Steel Plant) के सेक्टर-05 स्थित बोकारो इस्पात पुस्तकालय में गुरुवार की शाम एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें नगर के प्रबुद्ध कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को काव्य-रस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ गंगेश पाठक द्वारा माँ शारदे की वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय चेतना दर्पण की केंद्रीय समिति की सदस्या कस्तूरी सिन्हा ने कहा कि साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से राष्ट्र की दिशा निर्धारित करते हैं तथा बीएसएल प्रबंधन स्थानीय साहित्यकारों को मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाप्रबंधक (ठेका प्रकोष्ठ-गैर संकार्य) कमलेश कुमार ने राष्ट्र निर्माण में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए अपनी प्रस्तुति के माध्यम से कवियों की कल्पनाशीलता की सराहना की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उप-महाप्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन) आलोक कुमार ने कहा कि कविता मनुष्य की सुप्त भावनाओं को जागृत कर उसमें ऊर्जा और संवेदनशीलता का संचार करने की अद्भुत क्षमता रखती है।

गोष्ठी के दौरान विभिन्न कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंजना श्रीवास्तव ने ‘पुष्पों के रंगों में रंगकर’, अर्चना मिश्र ने ‘एक दिन छायी आईआईटी भी जाएगी उस अनंत अंधेरे में’, गंगेश पाठक ने ‘मित्र के समान’, अमृता शर्मा ने ‘भला ऐसी होली है किस काम की’, कस्तूरी सिन्हा ने ‘होली खेले मेरे लाल, शोणित से भीगे हुए हैं’, लव कुमार ने ‘जो देशभक्ति नहीं करोगे तो देशभक्त कैसे बनोगे’, अनिल कुमार श्रीवास्तव ने ‘खुद से ही सवाल करता हूँ’, रजतनाथ ने ‘मेरी फूस की झोपड़ी’, क्रांति श्रीवास्तव ने ‘परिचय पूछ रहे हो मेरा’, पंकज कुमार दास ने ‘बाग तो बहुत हैं पर…’, तथा अरुण पाठक ने अपनी मैथिली रचना होली गीत ‘होली पावनि अछि मनभावन एकरा सभ मिलि संग मनाउ’ की सुमधुर प्रस्तुति से सबकी वाहवाही लूटी। इसके अतिरिक्त अतुल कुमार, आर.पी. वर्मा, रंजन कुमार तथा ब्रह्मानंद गोस्वामी ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
कार्यक्रम की सफलता में सहायक प्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन) मानस चंद्र रजवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गोष्ठी का संचालन लव कुमार ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं अमृता शर्मा ने अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन बोकारो इस्पात संयंत्र की अपने सामाजिक एवं सांस्कृतिक दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। साहित्य और कला के प्रोत्साहन के माध्यम से बीएसएल न केवल बौद्धिक चेतना का विकास कर रहा है, बल्कि सामुदायिक जुड़ाव को सुदृढ़ करते हुए एक समृद्ध सांस्कृतिक वातावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

