आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, सैटेलाइट निगरानी और प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों के दौर में दुनिया की कई सेनाएँ अब एक अनोखे लेकिन प्रभावी हथियार का सहारा ले रही हैं — इन्फ्लेटेबल (inflatable-फुलाए जाने वाले) सैन्य डिकॉय (टैंक, बख्तरबंद वाहन, तोपखाने और लड़ाकू विमानों जैसे आधुनिक हथियारों की हूबहू दिखने वाली इन्फ्लेटेबल प्रतिकृतियाँ )। टैंक, मिसाइल लॉन्चर, फाइटर जेट और रडार सिस्टम की तरह दिखने वाले ये हल्के नकली ढाँचे दुश्मन को भ्रमित करने और असली सैन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी लोकप्रियता का कारण साफ है — सस्ते डिकॉय दुश्मन को महंगी मिसाइलें और ड्रोन बेकार में खर्च करने पर मजबूर कर सकते हैं। इस तरह यह आधुनिक युद्ध में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपकरण बनता जा रहा है।
चेक गणराज्य बना प्रमुख निर्माता
इन्फ्लेटेबल सैन्य डिकॉय के निर्माण में चेक गणराज्य दुनिया के प्रमुख उत्पादकों में उभर कर सामने आया है। वहां की रक्षा कंपनियाँ टैंक, बख्तरबंद वाहन, तोपखाने और लड़ाकू विमानों जैसे आधुनिक हथियारों की हूबहू दिखने वाली इन्फ्लेटेबल प्रतिकृतियाँ बनाती हैं।
इन मॉडलों को कुछ ही मिनटों में तैनात किया जा सकता है, जिससे सेनाएँ युद्धक्षेत्र में आसानी से नकली सैन्य तैनाती का भ्रम पैदा कर सकती हैं।

कई देशों में बढ़ रहा बाजार
इन्फ्लेटेबल सैन्य डिकॉय की बढ़ती मांग के कारण कई देशों ने इस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है।
चेक गणराज्य:
यह देश इन्फ्लेटेबल डिकॉय सिस्टम का प्रमुख सप्लायर बन चुका है। यहां की कंपनियाँ टैंक, मिसाइल लॉन्चर, तोपखाने और विमानों की कई तरह की प्रतिकृतियाँ बनाती हैं, जिनका इस्तेमाल कई देशों की सेनाएँ करती हैं।
चीन:
चीन में भी टैंक, हेलीकॉप्टर और मिसाइल सिस्टम की इन्फ्लेटेबल प्रतिकृतियाँ बनाई जाती हैं। इनका उपयोग मुख्यतः सैन्य प्रशिक्षण और युद्ध अभ्यास के दौरान भ्रम पैदा करने के लिए किया जाता है।
रूस:
रूस लंबे समय से टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और बख्तरबंद वाहनों के इन्फ्लेटेबल डिकॉय का इस्तेमाल करता रहा है। इनका उद्देश्य असली सैन्य उपकरणों को छिपाना और दुश्मन की निगरानी को भ्रमित करना होता है।
दक्षिण कोरिया:
दक्षिण कोरिया की रक्षा कंपनियों ने आधुनिक लड़ाकू विमानों जैसे प्लेटफॉर्म की इन्फ्लेटेबल प्रतिकृतियाँ तैयार की हैं। कुछ मॉडलों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे रडार सिग्नल की भी नकल कर सकें।
पश्चिमी यूरोप:
ब्रिटेन और फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों की कंपनियाँ भी सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए इन्फ्लेटेबल डिकॉय और लक्ष्य तैयार करती हैं।
सस्ते लेकिन बेहद रणनीतिक
ये इन्फ्लेटेबल डिकॉय मजबूत सिंथेटिक सामग्री से बनाए जाते हैं और इन्हें छोटे पैकेज में ले जाकर कुछ ही मिनटों में फुलाया जा सकता है। कई आधुनिक मॉडलों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे दिखावट के साथ-साथ रडार और थर्मल सिग्नेचर की भी नकल कर सकें।
रक्षा योजनाकारों के अनुसार, इन डिकॉय की मदद से युद्धक्षेत्र में नकली टैंक कॉलम, मिसाइल बैटरियाँ या एयरबेस तैयार किए जा सकते हैं, जिससे दुश्मन की खुफिया जानकारी और हमले की रणनीति भ्रमित हो जाती है।
पुराने युद्ध कौशल का आधुनिक रूप
सैन्य धोखे की रणनीति नई नहीं है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी सेनाएँ लकड़ी के टैंक और नकली विमानों का इस्तेमाल दुश्मन को भ्रमित करने के लिए करती थीं। आज के इन्फ्लेटेबल सिस्टम उसी रणनीति का आधुनिक और अधिक उन्नत रूप हैं, जिन्हें आधुनिक सेंसर और निगरानी तकनीकों को धोखा देने के लिए बनाया गया है।
ड्रोन युद्ध के दौर में बढ़ेगी मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ड्रोन युद्ध और सैटेलाइट निगरानी बढ़ेगी, इन्फ्लेटेबल सैन्य डिकॉय का वैश्विक बाजार भी तेजी से बढ़ेगा। जब एक प्रिसिजन मिसाइल की कीमत लाखों-करोड़ों रुपये हो सकती है, तब सस्ते इन्फ्लेटेबल डिकॉय सेनाओं के लिए अपने महंगे सैन्य संसाधनों की रक्षा का बेहद प्रभावी तरीका बनते जा रहे हैं।

