BSL के सेक्टरों में सिमटते Park, बढ़ता अतिक्रमण

BSL के सेक्टरों में सिमटते Park, बढ़ता अतिक्रमण
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बच्चों से छिन रहा खेल का मैदान, बुजुर्गों को सड़कों पर टहलने की मजबूरी

 

by Apurva | Bokaro:

जिस बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर जीवन देने के उद्देश्य से सेक्टरों में चिल्ड्रेन पार्क (Park), खेल मैदान (Play Grounds) और हरित क्षेत्र विकसित किए थे, आज वही पार्क अतिक्रमण (Encroachment) की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। हालत यह है कि बच्चों के खेलने के लिए मैदान नहीं बच रहे हैं, जबकि बुजुर्गों को सुबह-शाम सैर करने के लिए सड़कों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे हर समय सड़क दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

बीएसएल में बड़े पैमाने पर इस्पात उत्पादन के कारण वातावरण में नियमित रूप से विभिन्न प्रकार की गैसें और सूक्ष्म हानिकारक कण उत्सर्जित होते हैं। औद्योगिक प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील वर्गों पर पड़ता है। इसी चुनौती को देखते हुए वर्षों पहले सेक्टरों में पार्क और खुले मैदान विकसित किए गए थे, ताकि लोग स्वच्छ वातावरण में टहल सकें और बच्चे खेल-कूद के माध्यम से स्वस्थ जीवन जी सकें।

लेकिन समय के साथ इन सार्वजनिक परिसंपत्तियों पर अतिक्रमण बढ़ता गया और जिम्मेदार एजेंसियां मूकदर्शक बनी रहीं। कई चिल्ड्रेन पार्कों और मैदानों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। कहीं स्थायी निर्माण हो गए हैं तो कहीं व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। सेक्टर-3 स्थित बोकारो मॉल के समीप बने चिल्ड्रेन पार्क में भी दुकानों का निर्माण कर लिया गया है, लेकिन अब तक अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पार्क और मैदान ही खत्म हो जाएंगे तो बच्चों का बचपन और बुजुर्गों का स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होंगे। खेल मैदानों के अभाव में बच्चे मोबाइल और डिजिटल उपकरणों तक सीमित होते जा रहे हैं, जबकि बुजुर्गों को सड़कों पर टहलने के कारण दुर्घटनाओं का जोखिम उठाना पड़ रहा है।

शहर के विभिन्न सेक्टरों में बड़ी संख्या में ऐसे सेवानिवृत्त दंपती रहते हैं, जिनके बच्चे बाहर नौकरी या व्यवसाय करते हैं। ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए पार्क केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार हैं। सेक्टरवासियों का कहना है कि यदि बीएसएल प्रबंधन ने समय रहते पार्कों और मैदानों को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया, तो आने वाली पीढ़ी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


क्या कहते हैं सेक्टरवासी

अशोक कुमार मिश्र, सेवानिवृत्त अभियंता, बीएसएल

“जिन लोगों ने बीएसएल को खड़ा किया और अपनी पूरी जवानी इस संयंत्र को समर्पित कर दी, आज उन्हें बुढ़ापे में टहलने के लिए मैदान तक नसीब नहीं हो रहा है। मजबूरी में सड़कों पर घूमना पड़ता है, जहां हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।”


अखिलेश कुमार, सेक्टर-4 निवासी

“लगभग सभी सेक्टरों के चिल्ड्रेन पार्क और खेल मैदान अतिक्रमण की चपेट में हैं। सेक्टर-3 के पार्क में दर्जनों दुकानें बन गई हैं। बच्चों के खेलने की जगह खत्म हो रही है और बुजुर्गों को भी सुरक्षित स्थान नहीं मिल रहा है।”


अधिवक्ता अमर नाथ प्रसाद, सेक्टर-2 डी

“सेक्टर-2 डी के चिल्ड्रेन पार्क पर भी कब्जा हो चुका है। मैदान नहीं मिलने के कारण बच्चे खेल-कूद छोड़कर मोबाइल में अधिक समय बिताने लगे हैं। इससे उनकी शारीरिक गतिविधियां घट रही हैं और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।”


अधिवक्ता संजीव कुमार उपाध्याय, सेक्टर-3

“बीएसएल प्रबंधन को प्रत्येक सेक्टर के पार्कों और मैदानों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। अतिक्रमण हटाकर इन्हें फिर से बच्चों और बुजुर्गों के लिए उपलब्ध कराया जाए। सड़कों पर टहलने की मजबूरी के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की खबरें सामने आती रहती हैं। अब ठोस कार्रवाई का समय आ गया है।”

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