PM-RAHAT योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज मिल सकता है। जानें पात्रता, लाभ, सात दिन की उपचार सीमा और 112 हेल्पलाइन की जानकारी।
सड़क हादसे में घायल लोगों को समय पर इलाज मिल सके और पैसों की कमी के कारण किसी की जान न जाए, इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री–रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट (PM-RAHAT) योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को इस योजना की देशव्यापी शुरुआत की। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसे के बाद घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना और उनका इलाज शुरू कराना है। खासकर दुर्घटना के बाद का पहला घंटा, जिसे ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है, किसी घायल व्यक्ति की जान बचाने में बेहद महत्वपूर्ण होता है।
सरकार का मानना है कि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कई मौतों को रोका जा सकता है।
क्या है PM-RAHAT योजना?
PM-RAHAT का पूरा नाम प्रधानमंत्री–रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट है। इस योजना का उद्देश्य मोटर वाहन से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को निर्धारित शर्तों के तहत कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना है।
इस योजना को पहले मई 2025 में ‘कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम’ के नाम से अधिसूचित किया गया था। बाद में फरवरी 2026 में देशव्यापी शुरुआत के दौरान इसका नाम बदलकर PM-RAHAT कर दिया गया।
यह पहल मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम है। इसके तहत अस्पतालों, पुलिस, आपातकालीन सेवाओं और डिजिटल सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया है।
PM-RAHAT योजना के प्रमुख लाभ
1. ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज
योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है। यह सुविधा निर्धारित उपचार पैकेज, पात्रता और योजना की अन्य शर्तों के अनुसार उपलब्ध होगी।
2. सात दिनों तक इलाज की सुविधा
दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक इलाज का प्रावधान है। हालांकि, उपचार पर होने वाला खर्च निर्धारित वित्तीय सीमा और लागू नियमों के अधीन रहेगा।
3. गंभीर घायलों को तत्काल राहत
योजना में गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे तक और जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार (स्टेबलाइजेशन ट्रीटमेंट) का प्रावधान है। इसका उद्देश्य घायल व्यक्ति की हालत को स्थिर करना और जरूरी चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना है। यह सुविधा योजना में निर्धारित प्रक्रियाओं और शर्तों के अनुसार लागू होगी।
4. सड़क की श्रेणी से नहीं होगा फर्क
योजना का उद्देश्य मोटर वाहन से हुई पात्र सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को राहत देना है। दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग या किसी अन्य सड़क पर हुई हो, केवल सड़क की श्रेणी के आधार पर पात्रता तय नहीं होती।
PM-RAHAT योजना का लाभ कैसे मिलेगा?
सरकार ने PM-RAHAT को 112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा से जोड़ा है, ताकि दुर्घटना के समय घायलों को मदद मिल सके और उन्हें नजदीकी निर्धारित अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।
योजना के तहत प्रक्रिया इस प्रकार है:
पहला कदम: 112 पर कॉल करें।
सड़क दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति, उसके परिजन या मौके पर मौजूद कोई भी मददगार 112 पर संपर्क कर सकता है। जरूरत के अनुसार एंबुलेंस और अस्पताल संबंधी सहायता मांगी जा सकती है।
दूसरा कदम: निर्धारित अस्पताल पहुंचें।
घायल को योजना के तहत इलाज के लिए अधिकृत अस्पताल में पहुंचाया जाता है। वहां उसकी स्थिति के अनुसार जरूरी चिकित्सा सहायता शुरू की जाती है।
तीसरा कदम: पंजीकरण और सत्यापन।
अस्पताल में दुर्घटना से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। इसके बाद निर्धारित डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से जरूरी दस्तावेज और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
चौथा कदम: इलाज और भुगतान की प्रक्रिया।
अस्पताल योजना के नियमों के अनुसार पात्र इलाज उपलब्ध कराता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत इलाज के खर्च का दावा प्रस्तुत किया जाता है और सत्यापन के बाद भुगतान किया जाता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासनिक औपचारिकताओं या पैसों की व्यवस्था के कारण घायल व्यक्ति के इलाज में अनावश्यक देरी न हो।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
PM-RAHAT योजना का उद्देश्य मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को राहत देना है। हालांकि, लाभ पाने के लिए योजना की पात्रता संबंधी शर्तों का पूरा होना और निर्धारित अस्पताल में इलाज कराना जरूरी है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) और PM-RAHAT के उद्देश्य अलग-अलग हैं। आयुष्मान भारत के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता है, जबकि PM-RAHAT विशेष रूप से पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों के उपचार पर केंद्रित है।
इसलिए, केवल आयुष्मान भारत कार्ड नहीं होने के कारण किसी व्यक्ति को PM-RAHAT का लाभ पाने से स्वतः वंचित नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि, इलाज योजना के नियमों और निर्धारित अस्पतालों की व्यवस्था के अनुसार ही मिलेगा।
आयुष्मान भारत के तहत सूचीबद्ध वे अस्पताल, जो PM-RAHAT की संबंधित शर्तों को पूरा करते हैं, इस योजना के तहत भी निर्धारित अस्पताल के रूप में काम कर सकते हैं।
इलाज का खर्च कौन उठाएगा?
योजना के तहत कैशलेस इलाज के खर्च की व्यवस्था मोटर वाहन दुर्घटना कोष (मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड) के माध्यम से की गई है। दुर्घटना की परिस्थितियों के अनुसार इसके लिए अलग-अलग वित्तीय प्रावधान लागू होते हैं।
- बीमित वाहन से दुर्घटना: ऐसे मामलों में सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
- बिना बीमा वाले वाहन और हिट एंड रन के मामले: पात्र इलाज के लिए सरकारी बजटीय सहायता का प्रावधान है।
योजना में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा दावा मंजूर किए जाने के बाद 10 दिनों के भीतर भुगतान का प्रावधान भी निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और उन्हें घायलों का इलाज करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
22 हजार से अधिक लोगों को मिला लाभ
सरकार की ओर से 12 अगस्त 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 22,481 सड़क दुर्घटना पीड़ित PM-RAHAT योजना का लाभ उठा चुके थे।
योजना के नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है। इसके अलावा, शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि योजना का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि जरूरतमंद लोगों को कितनी जल्दी अस्पताल, एंबुलेंस और कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है।
योजना के सामने क्या हैं चुनौतियां?
PM-RAHAT का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी सफलता के लिए जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी होगा। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में पर्याप्त संख्या में निर्धारित अस्पतालों की उपलब्धता एक बड़ी जरूरत है।
इसके साथ ही लोगों को 112 हेल्पलाइन और योजना के लाभों के बारे में जागरूक करना, पुलिस सत्यापन में देरी रोकना और अस्पतालों के दावों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
अस्पतालों, पुलिस, एंबुलेंस सेवाओं और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल से ही योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा। शिकायतों का त्वरित समाधान और नियमों की नियमित निगरानी भी इसके प्रभावी क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाएगी।
निष्कर्ष
PM-RAHAT योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत पात्र लोगों को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज और सात दिनों तक उपचार की सुविधा देने का प्रावधान है।
इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि सड़क हादसे में घायल किसी व्यक्ति को पैसों की कमी के कारण इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े। हालांकि, इसकी सफलता अस्पतालों की उपलब्धता, आपातकालीन सेवाओं की गति और भुगतान व्यवस्था की पारदर्शिता पर निर्भर करेगी।
अगर योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह न केवल घायलों के परिवारों पर अचानक पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम कर सकती है, बल्कि समय पर इलाज उपलब्ध कराकर कई लोगों की जान बचाने में भी मददगार साबित हो सकती है।
PM-RAHAT योजना के लिए कौन पात्र है? (Who Is Eligible for PM-RAHAT?)भारत में किसी भी मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति PM-RAHAT योजना के तहत कैशलेस इलाज का लाभ पाने के पात्र हो सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र दुर्घटना पीड़ित को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज, दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक, उपलब्ध कराने का प्रावधान है। PM-RAHAT योजना के लिए पात्रता की शर्तें
योजना के तहत कितनी सहायता मिलेगी?
क्या पुलिस सत्यापन जरूरी है?योजना के तहत पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया भी निर्धारित है। गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे और जानलेवा मामलों में 48 घंटे के भीतर संबंधित प्रक्रिया पूरी करने का प्रावधान है। IMPORTANT: PM-RAHAT सामान्य बीमा या नियमित बीमारियों के इलाज की योजना नहीं है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। वास्तविक लाभ योजना के लागू नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अधीन होगा। |


