India ने पेश किए 3 स्वदेशी AI मॉडल, दो बिना Internet के भी करेंगे काम

India ने पेश किए 3 स्वदेशी AI मॉडल, दो बिना Internet के भी करेंगे काम
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India unveils three homegrown AI models – EKA-1, Dhīr 2B and Dhīr 5B. Two can run offline, bringing multilingual AI capabilities to compatible devices.

 

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में India ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश में विकसित तीन (3) स्वदेशी AI मॉडल- EKA-1, Dhīr 2B और Dhīr 5B पेश किए गए हैं। इन मॉडलों को भारतीय जरूरतों और भाषाई विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। खास बात यह है कि इनमें से दो मॉडल बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम कर सकते हैं।

इन मॉडलों को 3 नवंबर को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने पेश किया। इनका उद्देश्य केवल तकनीकी प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि AI को देश के आम लोगों, संस्थानों और उद्योगों के लिए अधिक उपयोगी और सुलभ बनाना है।

तीनों मॉडलों की अलग-अलग खूबियां

EKA-1: जटिल काम और तर्क क्षमता पर जोर

EKA-1 को Soket Labs ने विकसित किया है। लगभग 26.3 अरब पैरामीटर वाले इस मॉडल को करीब 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है। यह तर्क-विचार, गणित, कोडिंग और जटिल कार्यों को पूरा करने में सक्षम है। इसे 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के लिए तैयार किया गया है।

इसका इस्तेमाल बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, साइबर सुरक्षा और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसे निजी क्लाउड, कंपनियों के अपने सर्वर और इंटरनेट से अलग सुरक्षित नेटवर्क पर भी तैनात किया जा सकता है।

Dhīr 2B और Dhīr 5B: बिना इंटरनेट के AI की सुविधा

Dhīr सीरीज के दोनों मॉडल ZenteiQ AiTech Innovations ने विकसित किए हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें उपयुक्त डिवाइस पर स्थानीय रूप से चलाया जा सकता है। यानी कई कामों के लिए इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।

ये मॉडल हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी और ओड़िया सहित 10 भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी को भी सपोर्ट करते हैं।

Dhīr 2B को हल्के और अपेक्षाकृत कम संसाधनों वाले कामों के लिए तैयार किया गया है। यह दस्तावेजों की खोज, सूचनाओं को निकालने और स्थानीय स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराने जैसे कार्य कर सकता है। वहीं, Dhīr 5B अधिक जटिल कार्यों, बहुभाषी सहायता और संस्थागत इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है। इसका उपयोग सरकारी सेवाओं, शिक्षा और उद्योगों में दस्तावेज आधारित कामकाज तथा कार्यों के स्वचालन में किया जा सकता है।

भारत बनेगा दुनिया की AI एप्लीकेशन राजधानी: वैष्णव

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 6 नवंबर को कहा कि भारत का लक्ष्य दुनिया की ‘AI एप्लीकेशन कैपिटल’ बनना है। उनका जोर इस बात पर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लाभ केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में भी इसका व्यापक इस्तेमाल हो।

उन्होंने कहा कि भारत AI के क्षेत्र में केवल तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ऐसे व्यावहारिक समाधान तैयार करना चाहता है, जिनका लाभ आम लोगों और विभिन्न उद्योगों को मिल सके।

सेमीकंडक्टर और स्वदेशी GPU पर भी जोर

AI के विकास के साथ-साथ भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के लिए पोर्टल शुरू किए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि स्वदेशी GPU विकसित करने का रोडमैप भी अंतिम चरण में है। सरकार का ध्यान सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण के तहत देश में चिप निर्माण और डिजाइन की क्षमता को मजबूत करने पर है।

डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

स्वदेशी AI मॉडल विकसित होने से भारत को विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां इंटरनेट की सुविधा सीमित है या डेटा की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है, वहां स्थानीय स्तर पर चलने वाले AI मॉडल उपयोगी साबित हो सकते हैं।

हालांकि, इन मॉडलों की वास्तविक सफलता उनकी उपलब्धता, प्रदर्शन, सुरक्षा और अलग-अलग उपकरणों पर उपयोग की क्षमता पर निर्भर करेगी। फिर भी, भारतीय भाषाओं में AI सेवाएं उपलब्ध कराने और इंटरनेट के बिना भी तकनीक का लाभ पहुंचाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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