आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और जॉब्स: भारत की बदलती कार्य-दुनिया
by Ashis Sinha
नई दिल्ली: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर यह आशंका लंबे समय से जताई जाती रही है कि यह इंसानों की नौकरियाँ छीन लेगा। लेकिन भारत से सामने आ रहे ताज़ा आँकड़े एक अलग और अधिक संतुलित तस्वीर पेश करते हैं—जहाँ AI काम को खत्म नहीं, बल्कि उसे नया रूप दे रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रहा है।
उद्योग संगठन नासकॉम की 2024 की रिपोर्ट Advancing India’s AI Skills के अनुसार, भारत का AI टैलेंट पूल 2027 तक दोगुने से भी अधिक होने की राह पर है। AI पेशेवरों की संख्या मौजूदा 6–6.5 लाख से बढ़कर 12.5 लाख से अधिक होने का अनुमान है, जो सालाना करीब 15 प्रतिशत की दर से वृद्धि को दर्शाता है। डेटा साइंस, डेटा क्यूरेशन, AI इंजीनियरिंग और एडवांस्ड एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
सरकारी आँकड़े भी इसी रुझान की पुष्टि करते हैं। अगस्त 2025 तक करीब 8.65 लाख उम्मीदवारों ने उभरती तकनीकों से जुड़े पाठ्यक्रमों में दाख़िला लिया या प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें से 3.20 लाख से अधिक ने AI और बिग डेटा एनालिटिक्स में ट्रेनिंग ली। यह साफ़ संकेत है कि भविष्य के कौशलों को लेकर युवाओं और पेशेवरों में उत्साह बढ़ रहा है।
Artificial Intelligence is not just a technological shift, it’s a workforce revolution.
As continues to augment roles and create new opportunities, it is expected to transform 38 million jobs transform by 2030!Read India Skills Report for more: https://t.co/99iz1niJdC#AI… pic.twitter.com/3Nw9pIvQzx
— CII Western Region (WR) (@CII4WR) December 31, 2025
वर्कफोर्स को तैयार करने पर ज़ोर
इस बदलाव के लिए कार्यबल को तैयार करने के उद्देश्य से Ministry of Electronics and Information Technology ने FutureSkills PRIME कार्यक्रम शुरू किया है। यह राष्ट्रीय स्तर का री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग प्लेटफ़ॉर्म है, जिसमें AI सहित 10 उभरती तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगस्त 2025 तक इस प्लेटफ़ॉर्म पर 18.56 लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत हो चुके थे, जबकि 3.37 लाख से ज़्यादा लोग सफलतापूर्वक कोर्स पूरा कर चुके हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद AI को इंसानी क्षमताओं का पूरक बनाना है, न कि उनका विकल्प।
शासन और न्याय व्यवस्था में AI
AI का असर अब शासन और सार्वजनिक सेवाओं में भी दिखने लगा है। Supreme Court of India ने ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट फेज़-III के तहत उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया है, ताकि न्याय प्रणाली को अधिक तेज़, सुलभ और पारदर्शी बनाया जा सके।
मशीन लर्निंग, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग पर आधारित टूल्स का उपयोग अनुवाद, स्मार्ट शेड्यूलिंग, ऑटोमेटेड फाइलिंग और चैटबॉट सेवाओं में किया जा रहा है।
हाईकोर्ट्स में गठित AI ट्रांसलेशन कमेटियाँ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की निगरानी कर रही हैं। e-HCR और e-ILR जैसे प्लेटफ़ॉर्म अब नागरिकों को कई भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन फैसलों तक पहुँच दे रहे हैं।

मौसम और जलवायु सेवाओं में नई ताक़त
जलवायु और आपदा प्रबंधन में भी AI भारत की पूर्वानुमान क्षमता को मज़बूत कर रहा है। India Meteorological Department AI आधारित मॉडलों के ज़रिये बारिश, कोहरा, बिजली गिरने और जंगल की आग जैसी घटनाओं का अनुमान लगा रहा है।
एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक से चक्रवातों की तीव्रता आँकी जाती है, जबकि ‘मौसमGPT’ नामक प्रस्तावित AI चैटबॉट किसानों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को रियल-टाइम मौसम सलाह देने में मदद करेगा।
समावेशी विकास की दिशा में AI
समावेशी AI अपनाने को लेकर एक दीर्घकालिक रोडमैप NITI Aayog की रिपोर्ट AI for Inclusive Societal Development (अक्टूबर 2025) में पेश किया गया है। रिपोर्ट का फोकस भारत के लगभग 49 करोड़ लोगों वाले असंगठित क्षेत्र को सशक्त बनाना है, न कि उसे हाशिये पर धकेलना।
घर-घर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मियों, बढ़ई, किसानों जैसे श्रमिकों के अनुभवों के आधार पर रिपोर्ट कहती है कि तकनीक को इंसानी कौशल को बढ़ाने का माध्यम बनना चाहिए। AI, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स और इमर्सिव लर्निंग जैसी तकनीकों से भाषा, साक्षरता और समय पर भुगतान जैसी बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
इस दृष्टि में वॉयस-आधारित AI इंटरफेस, पारदर्शी भुगतान के लिए स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स और माइक्रो-क्रेडेंशियल्स शामिल हैं, जिससे श्रमिक अपनी गति से कौशल बढ़ा सकें।
डिजिटल श्रमसेतु मिशन
इस रणनीति का केंद्र प्रस्तावित डिजिटल श्रमसेतु मिशन है, जो असंगठित क्षेत्र के लिए बड़े पैमाने पर उन्नत तकनीकों को लागू करने की योजना है। मिशन में सेक्टर-आधारित प्राथमिकताएँ, राज्यों द्वारा कार्यान्वयन, नियामकीय सहयोग और उद्योग व सिविल सोसाइटी के साथ साझेदारी पर ज़ोर दिया गया है, ताकि तकनीक सस्ती और सुलभ बन सके।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इस समावेशी डिजिटल छलांग के लिए अनुसंधान एवं विकास में लगातार निवेश, लक्षित स्किलिंग कार्यक्रम और मज़बूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की ज़रूरत होगी। आधार, UPI और जनधन जैसी डिजिटल सार्वजनिक संरचनाओं का अनुभव दिखाता है कि बड़े और समावेशी प्लेटफ़ॉर्म सफल हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, भारत में AI को बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी का कारण नहीं, बल्कि नए रोज़गार, बेहतर शासन और अधिक समावेशी विकास का उत्प्रेरक माना जा रहा है—बशर्ते नीतियाँ, कौशल और तकनीक एक साथ आगे बढ़ें।

