Bhojshala के गर्भगृह (Sanctum) में पहली बार सरस्वती प्रतिमा स्थापित; गैर-हिंदुओं (Non-Hindus) के प्रवेश पर रोक

Bhojshala के गर्भगृह (Sanctum) में पहली बार सरस्वती प्रतिमा स्थापित; गैर-हिंदुओं (Non-Hindus) के प्रवेश पर रोक
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Dhar (MP): मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला (Bhojshala) परिसर में रविवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब हिंदू श्रद्धालुओं ने हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद परिसर के गर्भगृह (Sanctum) में पहली बार मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर दी। इसके कुछ ही घंटों बाद परिसर के बाहर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले पोस्टर लगाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया।

भोज उत्सव समिति के सदस्यों और बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रतिमा स्थापना से पहले पूरे परिसर में धार्मिक अनुष्ठान किए। गंगाजल और गोमूत्र से शुद्धिकरण किया गया, जबकि गर्भगृह में अखंड ज्योति भी प्रज्ज्वलित की गई। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों का माहौल देखने को मिला।

यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस अहम फैसले के कुछ दिनों बाद सामने आया है, जिसमें भोजशाला-कमाल मौला परिसर को सरस्वती मंदिर माना गया और 2003 के उस ASI आदेश को रद्द कर दिया गया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को यहां नमाज की अनुमति दी गई थी।

हाईकोर्ट (Hogh Court) ने भोजशाला (Bhojshala) को माना सरस्वती मंदिर

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि ऐतिहासिक दस्तावेज, पुरातात्विक साक्ष्य और साहित्यिक संदर्भ इस बात की पुष्टि करते हैं कि भोजशाला राजा भोज से जुड़ा मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।

अदालत ने इस स्थल को संरक्षित स्मारक होने के साथ-साथ देवी सरस्वती के पूजा स्थल के रूप में भी मान्यता दी।

पोस्टर लगने से बढ़ा विवाद

प्रतिमा स्थापना के बाद भोजशाला परिसर के बाहर कथित तौर पर ऐसे पोस्टर लगाए गए, जिनमें गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की बात कही गई।

भोज उत्सव समिति के सदस्य गोपाल शर्मा ने कहा कि सुरक्षा कारणों और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए केवल तिलक और भगवा गमछा पहनने वाले लोगों को ही प्रवेश दिया जाएगा।

इस कदम के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कई संगठनों ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और मामले को आगे अदालत में ले जाने के संकेत दिए हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फैसले का किया स्वागत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे आस्था, संस्कृति और इतिहास की जीत बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि भोजशाला की गरिमा ASI की निगरानी में और मजबूत होगी तथा श्रद्धालुओं के पूजा-अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

भोजशाला (Bhojshala) ?

धार स्थित भोजशाला वर्षों से देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक विवादों में से एक रही है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जिसका संबंध परमार वंश के महान राजा भोज से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि राजा भोज ने धार को संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा का बड़ा केंद्र बनाया था।

वहीं मुस्लिम समुदाय इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद मानता है, जिसका संबंध सूफी संत कमालुद्दीन चिश्ती से बताया जाता है। लंबे समय से दोनों समुदाय इस ASI संरक्षित परिसर पर अपना दावा करते रहे हैं।

वर्षों तक यहां एक विशेष व्यवस्था लागू थी, जिसके तहत अलग-अलग दिनों में हिंदू पूजा और मुस्लिम नमाज की अनुमति दी जाती थी। लेकिन हाईकोर्ट के हालिया फैसले ने दशकों पुराने इस विवाद को एक नई दिशा दे दी है, जिसका असर आने वाले समय में राजनीति और सामाजिक माहौल दोनों पर पड़ सकता है।

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