अरुण पाठक
Bokaro: भारती साहित्य परिषद, Bokaro की ओर से रविवार शाम को-ऑपरेटिव कॉलोनी स्थित रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यालय सभागार में हिन्दी दिवस पखवाड़ा के उपलक्ष्य में परिचर्चा सह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारती साहित्य परिषद के मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार सुख नंदन सिंह ‘सदय’ ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आशा पुष्प, संस्था के अध्यक्ष डॉ. परमेश्वर भारती, उपाध्यक्ष डॉ. राम नारायण सिंह, महासचिव डॉ. मनोज कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी एवं कवि अरुण पाठक सहित उपस्थित कवि-कवयित्रियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन कर किया। कवयित्री ज्योति वर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
हिन्दी की समृद्धि और विस्तार पर चर्चा
प्रथम सत्र में हिन्दी विषय पर आयोजित परिचर्चा में डॉ. आशा पुष्प ने आईआईटी में हिन्दी को प्रवेश दिलाने के लिए आंदोलन करने वाले प्रथम सेनानी श्याम रुद्र पाठक तथा उनके आंदोलन को समर्थन देने वाले ज्ञानी जैल सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिन्दी को आगे बढ़ाने में अनेक विभूतियों का महत्वपूर्ण और प्रशंसनीय योगदान रहा है। हिन्दी देश में व्यापक रूप से समझी और बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है।
वरिष्ठ साहित्यकार सुख नंदन सिंह ‘सदय’ ने कहा कि हिन्दी अत्यंत समृद्ध भाषा है और उसका साहित्य विश्व की किसी भी भाषा के साहित्य से कमतर नहीं है। उन्होंने हिन्दी के महान साहित्यकारों के योगदान का उल्लेख करते हुए देश के कोने-कोने में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में हिन्दी सिनेमा की भूमिका की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि हिन्दी का प्रभाव वैश्विक स्तर पर बढ़ा है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव में अभी तक हिन्दी को देश में वह स्थान नहीं मिल पाया है, जिसकी वह हकदार है।
काव्य गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां
दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत संजू कुमारी ने ‘हम महिलाएं नहीं किसी से कम…’ कविता प्रस्तुत कर की। इसके बाद विनय कुमार तिवारी ने ‘जोड़ती आई है हिन्दी हिन्दुस्तान को…’, डॉ. राम नारायण सिंह ने ‘मैं रहूंगा गांव में…’, नीतू सिसोदिया ने ‘मन का खालीपन…’, डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने ‘मेरा अरमान हिन्दी महान…’ और रीना यादव ने गजल ‘हमारे गांव में कच्चे मकान रहने दो…’ प्रस्तुत की।
डॉ. एस. एस. प्रसाद ने ‘आओ हिन्दी का करें विस्तार…’, अरुण पाठक ने ‘हिन्दी है हम सबकी भाषा, हिन्दी है जन-जन की भाषा…’, रिंकू गिरि ने ‘दस्तक’, ज्योति वर्मा ने ‘कमाल है हिन्दी…’, मनोज कुमार सुमन ने ‘कलम की विवशता’ और गीता कुमारी ‘गुस्ताख’ ने ‘मन मोहन में रम जाए रे…’ कविता प्रस्तुत की।
वहीं डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद ने ‘वैराग्य व अध्यात्म की शक्ति’, मंटू जी ने गीत, दिनेश कुमार सिंह ने ‘निर्दलीय’, प्रणन्वी ने ‘सुनते नहीं’, डॉ. परमेश्वर भारती ने देशभक्ति पर रचना, डॉ. मनोज कुमार सिंह ने नज़्म, डॉ. आशा पुष्प ने ‘हिन्दी की शक्ति’ तथा सुख नंदन सिंह ‘सदय’ ने हिन्दी पर कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. परमेश्वर भारती ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आर. एन. सिंह ने किया।

