News Desk: भारत की समुद्री और रणनीतिक विनिर्माण क्षमताओं को बड़ी मजबूती प्रदान करते हुए Bokaro Steel Plant (BSL) ने स्वदेशी रूप से विकसित शिपबिल्डिंग-ग्रेड स्टील (Ship Building Grade Steel) के लिए Lloyd’s Register से वैश्विक मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेशन हासिल किया है। इसे भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आयातित मरीन स्टील पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
यह उपलब्धि Steel Authority of India Limited (SAIL) के लिए हाई-वैल्यू स्पेशल स्टील (high-value special steel) सेक्टर में बड़ी छलांग है, जो समुद्री और रक्षा क्षेत्रों में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई ताकत देगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 13 मई 2026 को औपचारिक रूप से मिला यह सर्टिफिकेशन एक लंबे और जटिल तकनीकी क्वालिफिकेशन प्रोग्राम के बाद प्राप्त हुआ। इस दौरान बीएसपी ने समुद्री उपयोग के लिए निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया। प्लांट को A, B, D और LR Grade E सहित कई जनरल-स्ट्रेंथ शिपबिल्डिंग स्टील ग्रेड्स के लिए प्रमाणन मिला है।
हाई-स्ट्रेंथ कैटेगरी में भी Lloyd’s Register ने AH27S, AH32, AH36, AH40, DH27S, DH32, DH36, DH40, EH27S, EH32 और EH36 जैसे एडवांस मरीन स्टील ग्रेड्स को LR EH40 श्रेणी के तहत मंजूरी दी है।
हालांकि, यह सफर आसान नहीं था। सबसे बड़ी चुनौती वेल्डिंग प्रक्रियाओं, वेल्डर क्वालिफिकेशन और वेल्डिंग कंज्यूमेबल्स को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुरूप बनाना था। इसके लिए इंजीनियरों और तकनीकी टीमों ने व्यापक वेल्डिंग ट्रायल, प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन और डॉक्यूमेंटेशन रिव्यू किए।
क्वालिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान GTAW, SMAW, GMAW और SAW जैसी एडवांस वेल्डिंग तकनीकों का कई चरणों में परीक्षण और सुधार किया गया। Lloyd’s Register की तकनीकी टिप्पणियों और सुझावों को भी प्रक्रियाओं में शामिल किया गया ताकि मरीन-ग्रेड एप्लिकेशन के लिए पूरी तरह मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।

इस पूरी परियोजना में Welding Research Institute तथा SAIL-Research and Development Centre for Iron and Steel ने अहम भूमिका निभाई। दोनों संस्थानों ने बीएसपी की रिसर्च एंड कंट्रोल लैबोरेटरी के साथ मिलकर काम किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्टिफिकेशन भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाणित मरीन स्टील का बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन संभव होगा और देश की नौसेना, वाणिज्यिक शिपिंग तथा समुद्री अवसंरचना जरूरतों को भी मजबूती मिलेगी।
इस सफलता के साथ SAIL ने रणनीतिक क्षेत्रों के लिए विशेष स्टील विकसित करने में अपनी क्षमता को और मजबूत किया है। साथ ही, यह भारत की वैश्विक समुद्री विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का भी संकेत है।

